इंसेफेलाइटिस प्रभावित कुशीनगर जिले में स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के नाम पर इंडिया मार्क टू हैंडपंप, टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट और ओवरहेड टैंकों पर अब तक करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद नतीजा शून्य है। न तो लोगों को स्वच्छ पेयजल मयस्सर हो रहा है न ही इंसेफेलाइटिस पर लगाम लग रही है। जिले में 87 ओवरहेड टैंक निर्माणाधीन हैं तो 539 टीटीएसपी बनकर तैयार हैं लेकिन अभी कहीं पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हुई तो कहीं चालू होने के बाद ही खराबी आ गई। इंडिया मार्क टू हैंडपंपों की दशा तो और भी दयनीय है।
जनपद के मासूमों को इंसेफेलाइटिस से बचाने और लोगों को स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के लिए अब तक जिले भर में 50,540 इंडिया मार्क टू हैंडपंप लगाए जा चुके हैं। पहले ग्राम पंचायतों में इंडिया मार्क टू हैंडपंप लगवाने का काम जल निगम का था लेकिन अब यह जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को मिली हुई है।
इसके अलावा इंसेफेलाइटिस प्रभावित गांवों में स्वच्छ पेयजल के लिए जिले भर में 76 ओवरहेड टैंक बनवाए गए हैं। इनमें 11 ग्राम पंचायतों को हैंडओवर कर दिए गए हैं जबकि 65 जलनिगम के अधीन हैं। इसके अलावा 87 ओवरहेड टैंक अब भी निर्माणाधीन हैं। जलनिगम की मानें तो चार ओवरहेड टैंकों का निर्माण पूरा कराकर इसी महीने टेस्टिंग कराई जानी है। ये ओवरहेड टैंक रामपुर बंगरा, कटाई भरपुरवा, खुदरा अहिरौली और पिपराझाम गांव में हैं। रही बात टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट (टीटीएसपी) की तो जिले भर में अब तक 539 बनवाए जा चुके हैं। आगे भी 19 टीटीएसपी का निर्माण होना है लेकिन इनकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
कई जगह पेयजल सुविधाएं नदारद
इंसेफेलाइटिस प्रभावित गांवों में स्वच्छ पेयजल के लिए ओवरहेड टैंक, टीटीएसपी और इंडिया मार्क टू हैंडपंप लगाए गए हैं। एक ओवरहेड टैंक पर लागत उसकी क्षमता के अनुसार 15 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ रुपये तक होती है। 87 ओवरहेड टैंक अब भी निर्माणाधीन हैं।
गांव-गांव में टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट तीन-तीन लाख रुपये की लागत से गांवों में बनवाए गए हैं, जिनमें कहीं टीटीएसपी चालू ही नहीं हुआ तो कहीं शुरुआती दिनों में ही खराब हो गया। उदाहरण के तौर पर बतरौली में बना टीटीएसपी अब तक चालू नहीं हुआ। बतरौली के इंद्रसेनवा टोला में बना टीटीएसपी देखरेख के अभाव में क्षतिग्रस्त हो रहा है। विशुनपुरा ब्लॉक में 41 टीटीएसपी बने हैं, जिनमें 10 खराब हैं। जरार गांव में बना टैंक टाइप स्टैंड पोस्ट और इंडिया मार्क टू हैंडपंप दोनों खराब हैं।
इसी तरह ग्राम पंचायतों में लगे इंडिया मार्क टू हैंडपंप या तो मरम्मत के अभाव में बेकार पड़े हैं या फिर उन्हें रीबोर की दरकार है। कल्याणछापर गांव के कारखाना टोला में लगा इंडिया मार्क टू हैंडपंप वर्षों से खराब पड़ा है। जलनिगम विभाग के सूत्रों की मानें तो ग्राम पंचायतों में खराब पड़े इंडिया मार्क टू हैंडपंपों की मरम्मत और रीबोर के लिए शासन से करीब आठ करोड़ रुपये अवमुक्त हुए थे, जिनमें करीब चार करोड़ रुपये ही खर्च हुए।
हर साल शतक तक पहुंच रहा मौतों का ग्राफ
कुशीनगर जिले में इंसेफेलाइटिस का दुष्प्रभाव इतना है कि हर साल बच्चों से लगायत किशोर तक इस जानलेवा बीमारी की गिरफ्त में आते हैं। जिला अस्पताल से लगायत मेडिकल कॉलेज तक जाते-जाते कितने ही जिंदगी की जंग हार जाते हैं और जो बच जाते हैं वे ताउम्र विकलांगता का दंश झेलते हैं। पिछले वर्ष जनवरी से दिसंबर तक 1026 बच्चे इंसेफेलाइटिस की चपेट में आए थे, जिनमें 161 ने दम तोड़ दिया था। वहीं, इस वर्ष जनवरी से अब तक 831 बच्चे इंसेफेलाइटिस की गिरफ्त में आ चुके हैं। इनमें 98 बच्चों की मौत हो चुकी है।
ओवरहेड टैंक की 87 निर्माणाधीन परियोजनाओं को पूर्ण कराने के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। 65 ओवरहेड टैंक जलनिगम के पास हैं जो अभी पूरे नहीं हुए हैं। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि टैंक, पाइपलाइन और कनेक्शन वितरण का काम पूर्ण करने के बाद ही हैंडओवर कराएं। जिन 11 परियोजनाओं का हस्तांतरण हुआ है, उन ग्राम पंचायतों और उनके मजरों में उपभोक्ताओं को कनेक्शन न दिए जाने के कारण पेयजल आपूर्ति में दिक्कतें आ रही हैं। कारण यह कि 250 से 300 रुपये सालाना शुल्क पर पानी की आपूर्ति होनी है ताकि पंप के मेंटीनेंस और ऑपरेटर की सेलरी दी जा सके लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के लोग पानी के बदले कोई शुल्क नहीं देना चाहते। इस सिलसिले में बैठक करके विभागीय अभियंताओं को लोगों को प्रेरित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कृष्ण कुमार गुप्त, मुख्य विकास अधिकारी।