तमकुहीरोड। शरदकालीन गन्ने की बुवाई में क्षेत्र के किसान वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल करें। इससे गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी। सरकार इसके लिए कई योजनाएं चला रही है। उसका लाभ किसानों को उठाना चाहिए। तकनीक के इस्तेमाल से न केवल लागत कम करने में बल्कि गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उक्त बातें शुक्रवार को गन्ना अनुसंधान संस्थान सेवरही में कुशीनगर जिले के हाटा गन्ना समिति से आए 50 और कप्तानगंज गन्ना समिति से आए 50 गन्ना किसानों के प्रशिक्षण सत्र को संबोधित करते हुए संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. सुभाषचंद सिंह ने कहीं।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अर्चना शिराड़ी ने किसानों को उन्नतशील बीजों, कीटनाशकों के समुचित प्रयोग, संतुलित उर्वरकों के इस्तेमाल के साथ आधुनिक तकनीकी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद प्रशिक्षण के लिए आए किसानों ने वैज्ञानिकों के साथ गन्ना शोध संस्थान परिक्षेत्र का भ्रमण किया और गन्ने की उन्नतशील प्रजातियों के साथ नवीन यंत्रों के प्रयोग की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. विनय कुमार मिश्र, डॉ. वाईपी भारती, डॉ.कमलकिशोर साहू, डॉ. कृष्णपाल सिंह आदि मौजूद रहे।