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जिला अस्पताल में ईएमओ न दिल के डॉक्टर, मरीज हो रहे परेशान

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जिला अस्पताल की ओपीडी में खाली पड़ी डाक्टरों की कुर्सी। - फोटो : KUSHINAGAR
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जिला अस्पताल में ईएमओ न दिल के डॉक्टर, मरीज हो रहे परेशान
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कुशीनगर। जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में संसाधन तो बढ़ रहे हैं, लेकिन डॉक्टरों की संख्या निरंतर घट रही है। सबसे अधिक कमी विशेषज्ञ डॉक्टरों की है। 250 बेड के जिला अस्पताल और एमसीएच (मैटर्निटी एंड चाइल्ड हेल्थ विंग) में चार पुरुष और तीन महिला ईएमओ के सापेक्ष एक भी तैनाती नहीं है। न कार्डियोलॉजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ) हैं और न ही कोई फिजिशियन। अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या भी बहुत कम है।
इस वजह से ओपीडी के डॉक्टरों की ड्यूटी इमरजेंसी कक्ष में लग जाती है। नतीजा यह होता है कि ओपीडी में भी डॉक्टर नहीं मिलते हैं।
जिला अस्पताल संसाधनों के मामले में समृद्ध तो हो रहा है, लेकिन मानव संसाधन के मामले में निरंतर संख्या कम होती जा रही है। जिला अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का एक, वरिष्ठ चिकित्साधिकारी, वरिष्ठ फिजिशियन, वरिष्ठ शल्यक, सीनियर रेडियोलॉजिस्ट, फिजिशियन, शल्यक, एनेस्थेटिस्ट, फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट, वरिष्ठ पैथालॉजिस्ट, पैथालॉजिस्ट, नेत्र सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, हृदय रोग विशेषज्ञ, अस्थि रोग विशेषज्ञ, ईएमओ पुरुष, ईएनटी सर्जन, चिकित्साधिकारी और दंत चिकित्सक के कुल 25 पद हैं। इसके सापेक्ष 18 डॉक्टर ही तैनात हैं। सात पद रिक्त हैं। इसी अस्पताल में चिकित्सा अधीक्षिका, बाल रोग विशेषज्ञ, गायनाक्लोजिस्ट, आर्थेस्टेट्रीशियन, ईएमओ महिला और महिला चिकित्साधिकारी सहित कुल 12 महिला डॉक्टरों के पद हैं। इनके सापेक्ष सिर्फ दो तैनात हैं। पैरामेडिकल के 89 पदों के सापेक्ष 57 और अन्य स्टॉफ के 69 पदों के सापेक्ष आठ लोग ही कार्यरत हैं। 69 पद रिक्त हैं।
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100 बेड के एमसीएच में गायनोक्लोजिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ, पैथालॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थेटिस्ट, ईएमओ के अलावा स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट, प्रयोगशाला प्राविधिक, एक्सरे टेक्निशियन, ओटी टेक्निशियन और आउटसोर्सिंग चतुर्थ श्रेणी सहित कुल 81 पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष 52 लोग ही कार्यरत हैं। 29 पद रिक्त हैं। 31 जुलाई को जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग सलाहकार डॉ. सतीश रंजन और दिसंबर में एक मात्र महिला चिकित्सक डॉ. रीता बर्नवाल सेवानिवृत्त हो जाएंगी।
जिला अस्पताल में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की संख्या कम हो जाने की वजह से मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। इमरजेंसी कक्ष में अक्सर डॉक्टर नहीं मिलते हैं। शुक्रवार दोपहर में इमरजेंसी कक्ष में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। ओपीडी में नेत्र चिकित्सक, हड्डी रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन कक्ष, महिला चिकित्सक सहित अन्य डॉक्टरों के कक्ष खाली थे।
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जिला अस्पताल में आर्थोपेडिक सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट, फिजिशियन सहित कई विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। एक चेस्ट रोग विशेषज्ञ और पैथालॉजिस्ट, सात चाइल्ड स्पेशलिस्ट हैं। एक बाल रोग विशेषज्ञ 31 जुलाई और एक मात्र स्थायी महिला चिकित्सक डॉ. रीता बर्नवाल दिसंबर में सेवानिवृत्त हो जाएंगी। एक साथ पांच लिपिकों का तबादला हो गया है, जिन्हें शुक्रवार को रिलीव कर दिया गया। विशेषज्ञ डॉक्टर और अन्य स्टाफ काफी कम हो गए हैं। ईएमओ कोई नहीं है, जिसके चलते चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उपलब्ध स्टाफ में ही बेहतर इलाज उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. एसके वर्मा
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
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