निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मियों ने दिया धरना
एसी कार्यालय पर कार्य बहिष्कार कर धरने में शामिल हुए अधिकारी व कर्मचारी
हड़ताल के चलते पडरौना शहर में ठप रही दिन भर बिजली आपूर्ति
आपात स्थिति के लिए प्राइवेट लाइनमैन, आईटीआई के शिक्षकों व प्रशिक्षुओं की लगी ड्यूटी
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना/कसया। विद्युत निगम के निजीकरण के निर्णय के विरोध में विद्युत संगठनों की ओर से सोमवार को कार्य बहिष्कार किया गया। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले जिले भर के बिजली निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों ने कसया में अधीक्षण अभियंता कार्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान पडरौना नगर की 33 केवी की लाइन में फाल्ट के चलते आपूर्ति बाधित रही।
धरने को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता राजनाथ मिश्र ने कहा कि विद्युत निगम के निजीकरण से कर्मचारियों के अलावा उपभोक्ताओं का भी शोषण होगा। निजीकरण का फैसला जब तक वापस नहीं होगा, आंदोलन चलता रहेगा। सुरेश श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार निजीकरण के मामले में हठधर्मिता का व्यवहार कर रही है। निर्णय नहीं बदला तो आंदोलन और तेज होगा। मुन्ना कुमार ने कहा कि विद्युत निगम के कर्मचारी अपनी कड़ी मेहनत से घर-घर बिजली आपूर्ति का सपना साकार कर रहे हैं। लेकिन सरकार के निजीकरण के फैसले से कर्मचारी आहत हैं। पारस राय ने कहा कि विद्युत संगठन तब तक आंदोलन करता रहेगा, जब तक सरकार निर्णय वापस नहीं लेती। इस दौरान अधिशासी अभियंता सुजीत कुमार गुप्ता, ओमप्रकाश पासवान, जेई सर्वेश कुमार दूबे, रमेश कुमार, पीके गुप्ता, अरुण कुमार, इम्तियाज अहमद, राजन वर्मा, राजाराम सागर, अजय सिद्धार्थ, सुनील पांडेय, मेहताब आलम, अजीत तिवारी, अविनाश कुमार, संजय श्रीवास्तव समेत तमाम कर्मचारी मौजूद रहे।
पूरे दिन नहीं रही शहर में बिजली
पडरौना। विद्युत निगम के अफसरों के आंदोलन को देखते हुए जिला प्रशासन ने बिजली निगम में कार्यरत प्राइवेट बिजली मिस्त्री के अलावा आईटीआई के अध्यापकों व प्रशिक्षुओं की भी ड्यूटी लगाई थी। इसके बावजूद पूरे दिन पडरौना शहर में बिजली कटी रही। बताया गया कि कसया से ही 33 हजार केवी की सप्लाई बाधित है। बिजली आपूर्ति में दिक्कत संबंधित सूचना के लिए बने कंट्रोल रूम में शाम तक पडरौना में आपूर्ति बाधित रहने से संबंधित छह शिकायतें पहुंची थीं लेकिन बिजली निगम के अभियंताओं की हड़ताल के चलते इस समस्या का समाधान नहीं हो सका। इसके चलते सुबह 10 बजे से ही पडरौना शहर में बिजली आपूर्ति बाधित है।
निजीकरण से और खराब होगी बिजली वितरण की व्यवस्था
अधिशासी अभियंता प्रवीण कुमार चौबे ने कहा कि जब तक बिजली विभाग सरकार के अधीन था, सब कुछ ठीक चला। बाद में अलग-अलग चरणों में निजीकरण शुरू किया गया। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड बना लेकिन इससे कोई फायदा नहीं हुआ।
अवर अभियंता आरके सिंह ने कहा कि निजीकरण से केवल जनता व कर्मचारियों का शोषण होगा। अब तक जहां निजीकरण हुआ है, वहां भ्रष्टाचार व शोषण बढ़ा है। इससे सिर्फ विफलता मिलती है। निजी कंपनियां केवल अपने फायदे के लिए ही काम करेंगी।
एसडीओ पंकज कुमार गुप्ता ने कहा कि निजीकरण का आधार लाइन लॉस दर्शाया गया है। इसे नियंत्रित किया जा सकता है। परंतु सरकार इस मुद्दे पर अड़ियल रवैया अख्तियार किए हुए है। सरकार को जिद छोड़कर जनहित व कर्मचारी हित में निर्णय लेना चाहिए।
एसडीओ अवनीश श्रीवास्तव ने कहा कि निजीकरण से लूट व भ्रष्टाचार बढ़ेगा। जनता को अपने काम के लिए पहले से अधिक धन खर्च करना पड़ेगा। सरकार को निजीकरण से सिर्फ लाभ दिखाई दे रहा है। प्राइवेट कंपनियां अपने फायदे के लिए कार्य करेंगी।