कुशीनगर/पकवा इनार। कुशीनगर में निर्माणाधीन महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय की वर्तमान में अपनी जमीन नहीं है। यह जमीन मौजूदा समय में संस्कृति विभाग की है। अभी तक विवि का कुशीनगर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (कसाडा) से मानचित्र तक स्वीकृत नहीं हो पाया है।
डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने शासन को इसके लिए पत्र लिखा है, जो शासन स्तर पर लंबित है। दिशा की बैठक में सांसद विजय कुमार दुबे और कुशीनगर विधायक पीएन पाठक भी इसके लिए शासन स्तर पर पहल करने का आश्वासन दिया, लेकिन अभी तक मामला नहीं सुलझ सका है। जमीन हस्तांतरण नहीं होने से कृषि विवि के निर्माण पर ग्रहण लग सकता है।
मानचित्र स्वीकृति के लिए विवि के नाम से जमीन का होना व उसके भू-उपयोग का परिवर्तन किया जाना जरूरी है। हालाकि डीएम कृषि विवि के नाम से जमीन हस्तांतरण के लिए शासन को पत्र लिख चुके हैं, ताकि जमीन कृषि विभाग को हस्तांतरित किया जा सके। इसके लिए बीते 28 जुलाई को प्रमुख सचिव कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान रविंद्र कुमार ने विवि के नोडल व आचार्य नरेंद्र देव कृषि विवि कुमारगंज, अयोध्या के कुलपति के साथ बैठक कर समाधान के लिए मंथन किया था। 6 फरवरी 2025 को कसाडा बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता कर रहे कमिश्नर अनिल ढींगरा, उपाध्यक्ष तत्कालीन डीएम विशाल भारद्वाज व सचिव पारितोष मिश्र की मौजूदगी में संस्कृति विभाग की भूमि के हस्तांतरण व भू उपयोग परिवर्तन का मुद्दा आया था।
कमिश्नर ने तहसील स्तर पर विवि निर्माणाधीन भूमि का गाटा वार रिकार्ड तैयार करने के लिए निर्देशित किया था, ताकि शासन से भूमि का हस्तांतरण विवि को व भू उपयोग परिवर्तन किया जा सके, लेकिन शायद, इसको लेकर कोई कार्रवाई अब तक नहीं हो पाई है। इसको लेकर जिला प्रशासन की ओर से शासन में लगातार पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन अभी जमीन हस्तांतरण का मामला किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सका है। अगर समय रहते इसका निस्तारण नहीं हुआ तो आगे चलकर 145.82 एकड़ में बन रहे कृषि विवि के निर्माण पर ब्रेक लग सकता है।
कसया, सबया, बिंदवलिया और अनिरुद्धवा के किसान फंसे ःकृृषि विवि के दायरे में कसया, सबया, विशुनपुर बिंदवलिया और अनिरुद्धवा के किसानों का खेत है। जिन्होंने अब तक न तो मुआवजा लिया है और न ही इनकी जमीन अधिग्रहित की गई है।
इन किसानों की गाटावार रकबा का राजस्व विभाग ने रिपोर्ट तैयार किया है। किसानों की मांग है कि उन्हें उनके जमीन के बदले जमीन दिया जाए, लेकिन प्रशासन व शासन जमीन के बदले जमीन नहीं बल्कि मुआवजा देने के ही पक्ष में दिखाई दे रहा है। 28 जुलाई को प्रमुख सचिव कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान रविंद्र कुमार की बैठक में मुआवजा की ही बात हुई। हालांकि इसे शासन स्तर पर लंबित माना जा रहा है।
मैत्रेय परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी 195.82 एकड़ भूमि
राजस्व प्रशासन ने मैत्रेय परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए 195.82 एकड़ जमीन सबया, अनिरुद्धवा, कसया, विशुनपुर बिंदवलिया के किसानों से अधिग्रहित किया था।