शुद्ध खोवा कठोर होता है। खोवा में आयोडीन सॉल्यूशन डालें, अगर खोवा में मिलावट होगी तो उसका रंग बैंगनी हो जाएगा। यदि खोवा चखने पर थोड़ा कड़वा और रवेदार महसूस हो या फिर जीभ पर चिपकने लगे तो समझ लें कि इसमें वनस्पति घी की मिलावट है। खोवे को उंगलियों पर मसल कर भी देख सकते हैं। अगर खोवा असली है तो अंगुली पर नहीं चिपकेगा।
ऐसे करें मिलावटी मिठाई की पहचान
मिठाई को गर्म पानी में डालें, आयोडीन लें और इसे मिठाई वाले कटोरे में डाल दें। मिठाई घुलकर रंग बदलती है तो मिलावट है। नहीं तो ठीक है। मिठाई या खोवा पर टिंचर आयोडीन की पांच-छह बूंदें डालकर कुछ चीनी डाल दें। फिर इसे गर्म करें। अगर मिठाई या खोवे का रंग नीला हो जाए, तो समझ जाएं कि उसमें मिलावट है।
दूध में पानी
दूध की एक बूंद को चिकने या चमकदार तिरछी सतह पर डालने से शुद्ध दूध की बूंद धीरे-धीरे आगे बढ़कर पीछे एक सफेद निशान छोड़कर बहती है, जबकि पानी मिला दूध तेजी से बिना निशान छोड़े बहेगा।
दूध में स्टाॅर्च टिंचर आयोडीन की कुछ बूंदें मिलाने पर स्टार्च युक्त दूध में नीला रंग आ जाता है। टिंचर आयोडीन दवा की दुकान में आसानी से मिल जाती हैं।
दूध में यूरिया
दूध में यूरिया की जांच के लिए एक परखनली में थोड़ा दूध लेकर उसमें आधा चम्मच सोयाबीन या हरड़ पाउडर मिलाकर हिलाएं, फिर इसे पांच मिनट के लिए रख दें। इसके बाद इसमें एक लाल लिटमस पेपर डुबाने पर पेपर का रंग लाल से नीला हो जाए तो दूध में यूरिया की मिलावट मानी जाती है। लाल लिटमस पेपर स्टेशनरी की दुकान से मिल जाता है।
पुरुष एवं नेत्र चिकित्सालय के प्रभारी डॉ. संजीव सुमन ने बताया कि मिलावटी दूध, पनीर और घी खाने से हृदय, लीवर, किडनी, आंत को नुकसान पहुंचता है। इसके साथ ही पेट की बीमारी और कैंसर तक होने की आशंका रहती है। वहीं, केमिकल बच्चों को मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत कमजोर कर देते हैं। कई बार इन केमिकल के कारण नपुंसकता और अपंगता की भी समस्या आने का डर रहता है।
गर्मी के मौसम में बरती जाने वाली सावधानियां
-किसी भी दशा में बासी भोजन के उपयोग से बचें।
-अत्यधिक मात्रा में शुद्ध पानी का सेवन करें।
-अत्यधिक देर से काटकर रखें गए फलों का सेवन न करें।
-अत्यधिक देर से रखें फलों के जूस का सेवन न करें।
-खुले में बिक रही खाद्य सामग्री का सेवन न करें।
-रोजमर्रा चीनी, नमक एवं खाद्य तेल की प्रयोग की जाने वाली मात्रा से थोड़ा कम इस्तेमाल करें।
-रंगीन खाद्य पदार्थ एवं रंगीन मिठाइयों का प्रयोग न करें।
खाद्य औषधि प्रशासन विभाग के सहायक आयुक्त अंजनी कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि अभियान चलाकर प्रतिष्ठानों मिठाइयों सहित अन्य नमूने लिए जाते हैं। जांच की रिपोर्ट प्रयोगशाला से आने के बाद कार्रवाई की जाती है। 228 लोगों पर 59,15000 रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।