पडरौना। नए मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव के विरोध में बस और ट्रक चालकों की दो दिन की हड़ताल के बाद बुधवार को चालक अपने काम पर लौट आए। फिर भी जनजीवन पटरी पर नहीं आ पाया है। रोडवेज की बसें पूर्व की भांति संचालित होने से यात्रियों को आने-जाने में दिक्कतों से छुटकारा तो मिल गया लेकिन, दो दिन की परेशानी झेलने के बाद कुछ लोगों ने अपनी यात्रा टाल दी। इसका नतीजा हुआ कि न्यायालयों में फरियादी नहीं पहुंचे और अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णया लिया। इसी तरह ट्रक चालकों के काम पर लौट आने से जरूरी सामान की आपूर्ति भले शुरू हो गई है मगर खाने-पीने और दैनिक जरूरत की वस्तुओं की किल्लत रही। लोगों का कहना है कि स्थिति सामान्य होने में समय लगेगा।
इस कानून के विरोध में रोडवेज बस चालकों और ट्रक चालकों ने साल के पहले दिन ही हड़ताल शुरू कर दी। दूसरे दिन स्थिति और बिगड़ने लगी, जब दूध, सब्जी, फल से लगायत डीजल-पेट्रोल तक के लिए मारा-मारी शुरू हो गई। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गई थीं। ट्रक चालकों ने जगह-जगह ट्रक खड़े कर चक्का जाम किया और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। टेंपो चालक व अन्य निजी वाहन चालक भी इनके समर्थन में उतर गए। इससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित होने लगा। कई स्थानों पर चालकों और प्रशासन के बीच गतिरोध देखने को मिला।
मंगलवार की देर शाम इंडियन ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और केंद्र सरकार की बैठक में मिले आश्वासन के बाद चालकों ने हड़ताल वापस ले ली और काम पर लौट गए। सुबह से ही रोडवेज की बसें पडरौना और कसया बस स्टेशन पर पहुंचकर सवारियां बैठाने लगीं। दिन भर रोडवेज की बसों का आवागमन होता रहा है, जिससे यात्रियों को यात्रा करने में असुविधा कम हुई।
इसी तरह दूध, फल, सब्जी और दैनिक जरूरत की अन्य वस्तुओं के साथ-साथ पेट्रोल डीजल भी आसानी से उपलब्ध हो गया। इससे आमजन की दो दिनों से हो रही दिक्कतें कम हो गईं। हालांकि, कसया रोड स्थित एक पेट्रोल पंप पर पेट्रोल उपलब्ध न होने के कारण वाहन चालकों को असुविधा का सामना करना पड़ा।