पडरौना। मेडिकल कॉलेज में एक्स-रे कराने के लिए मारामारी हो रही है। जल्दी के चक्कर में लोग मरीज लेकर एक्स-रे कक्ष में पहुंच जा रहे हैं। इससे संक्रमण फैलने का खतरा है। विशेषज्ञों को कहना है कि एक्स-रे का रेडिएशन नुकसानदायक है। एक्स रे कक्ष में आम लोगों को प्रवेश वर्जित है। मंगलवार को 30 से अधिक लोग कक्ष में मरीजों को लेकर जमे रहे। मना करने पर तीमारदार स्वास्थ्य कर्मियों से उलझ जा रहे थे।
सीमावर्ती जिला होने से गोपालगंज, पश्चिमी चंपारण से भी मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं। रेडियोलॉजी विभाग में प्रतिदिन 220-250 मरीजों का एक्स-रे होता है। इनमें अधिकतर टीबी के मरीज होते हैं। चार की जगह सिर्फ दो टेक्निशियन होने से एक्स-रे में समय अधिक लगता है। मरीजों को लेकर तीमारदार भी एक्स-रे कक्ष में जमे रहते हैं। टेक्निशियन के मना करने के बाद भी बाहर नहीं निकल रहे थे।
दोपहर करीब 12.10 बजे एक्स-रे कक्ष में मरीजों की भीड़ रही। इनमें हड्डी रोग, श्वांस रोग, फेफड़ा और टीबी रोगी जांच कराने पहुंचे थे। श्वांस, फेफड़े और टीबी के मरीजों से अन्य मरीजों को संक्रमण का खतरा बना रहता है। बावजूद इसके किसी के चेहरे पर मास्क नहीं दिखा। 12:40 बजे तक 247 मरीजों का एक्स-रे किया जा चुका था और करीब 50 लोग यहां बारी का इंतजार कर रहे थे। वहीं, अल्ट्रासाउंड विभाग में दोपहर 12:50 बजे तक 19 मरीजों का अल्ट्रासाउंड हो चुका था। 15 मरीज कक्ष के बाहर अपनी बारी का इंतजार फर्श पर बैठकर कर रहे थे। मरीजों को बैठने के लिए समुचित व्यवस्था नहीं है।
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रेडियोलाॅजी विभाग के एक्स-रे कक्ष में जांच के लिए मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। स्टॉफ की कमी से कुछ दिक्कतें आ रही हैं। मेडिकल प्रशासन काम कर रहा है और अगले दो महीनों में इसे पूरा कर लिया जाएगा। एक्स-रे मशीन से रेडिएशन बहुत कम होता है, लेकिन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। मरीज के अलावा किसी को भी एक्सरे कक्ष के अंदर जाने की अनुमति नहीं है। लोग जल्दी के चक्कर में मशीन के पास जमे रहते हैं। एक्सरे कक्ष के बाहर सुरक्षाकर्मी की तैनाती की जाएगी। -डॉ. आरके शाही, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज