खड्डा। गंडक नदी पार बाढ़ प्रभावित मरचहवा गांव में इन दिनों आवारा कुत्तों से ग्रामीण परेशान हैं। करीब एक माह से उग्र हुए आवारा कुत्ते कई मवेशियों और बकरियों को काटकर घायल कर चुके हैं। कुत्ते के काटने के बाद एक बकरी की मौत हो गई, जबकि कई अन्य बकरियां बीमार हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी स्तर पर एंटी रैबीज इंजेक्शन की व्यवस्था नहीं होने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है।
मंगलवार सुबह मरचहवा दक्षिण टोला निवासी मैनुद्दीन की बकरी अचानक कुत्ते की तरह आवाज निकालने लगी। कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई। इसी गांव के छांगुर, मोशाएब, नासुर आदि की बकरियां भी बीमार बताई जा रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार करीब एक माह से गांव में आवारा कुत्ते अचानक उग्र हो गए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि आवारा कुत्तों ने गोबरी की पड़िया और दुर्गा भगत के मवेशी को काट लिया था। इसके अलावा कई बकरियां भी कुत्तों के हमले में घायल हुई थीं। गोबरी के मवेशी की बाद में मौत हो गई, जबकि दुर्गा भगत ने निजी चिकित्सक को बुलाकर किसी तरह इंजेक्शन लगवाया, जिससे उसका मवेशी अभी बचा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि कुत्तों के काटने से घायल अन्य बकरियों पर भी रैबीज का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और पशुपालन विभाग से गांव में तत्काल एंटी रेबीज इंजेक्शन की व्यवस्था कराने तथा आवारा कुत्तों को पकड़वाने की मांग की है।
इस संबंध में एसीबीओ /प्रभारी पशु चिकित्सा अधिकारी खडडा ज्ञानेन्द्र कुमार ने बताया कि एन्टी रॆबिज के इन्जेक्शन का सप्लाई हमारे विभाग को नहीं होता है। प्राइवेट से ही लगवाना पड़ेगा।