पडरौना। सुप्रीम कोर्ट कुत्तों के काटने की घटनाओं काे लेकर भले गंभीर हो पर जिला प्रशासन नहीं है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिले में 50 हजार से ज्यादा आवारा कुत्ते रास्तों पर बेधड़क घूम रहे हैं और आए दिन किसी न किसी को अपना शिकार बना रहे हैं पर आज तक प्रशासन ने इसे लेकर कोई कार्रवाई नहीं की।
जिला अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, रोज करीब 80 लोगों को वहां एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इसमें अन्य सरकारी अस्पताल, निजी क्लीनिक और नर्सिंग होम में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या जोड़ दी जाए तो यह संख्या और ज्यादा हो जाएगी। इसके बावजूद नगर निकाय व प्रशासन सुस्त हैं।
नगर निकायों में अब तक डॉग शेल्टर होम की व्यवस्था भी नहीं कर हुई है, न ही कुत्तों के बंध्याकरण का अभियान उस गति से चल रहा है। जिस कारण इनकी आबादी दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। अब सुप्रीम कोर्ट भी इस पर सख्त हो गया है कुत्तों के काटने के शिकार लोगों को मुअावजा देने का निर्देश दिया है।