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Kushinagar News: खुद को सीबीआई अधिकारी बता डॉक्टर से 35.75 लाख की ठगी

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हाटा (कुशीनगर)। सीबीआई अधिकारी बनकर साइबर ठगों ने एक निजी डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट करके 35.75 लाख की ठगी कर ली। जालसाजों ने मानव तस्करी के मामले में फंसाने, संपत्ति नीलाम कराने की धमकी देकर वारदात को अंजाम दिया। डॉक्टर दो बैंक अकाउंट में कर्ज लेकर, पत्नी का जेवर बेचकर जालसाजों को रकम ट्रांसफर की। दो दिन बाद बेटी से बात करने पर उन्हें ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने पुलिस को तहरीर दी। साइबर टीम की मदद से पुलिस मामले की जांच शुरू कर दी है।
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जानकारी के अनुसार, हाटा कोतवाली क्षेत्र के एक डॉक्टर के साथ साइबर ठगी का मामला सामने आया है। हाटा कोतवाली क्षेत्र के बतरौली गांव निवासी डॉ. शिवदत्त सिंह ने बताया कि 20 सितंबर को उनके मोबाइल पर व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए मानव तस्करी के मामले में उनके खिलाफ साक्ष्य मिलने की बात कही। इसके बाद गिरफ्तारी और संपत्ति नीलाम कराने की धमकी देकर रुपये मांगे।

गहने बेचे, रिश्तेदारों से लिया कर्ज, कंगाल होने पर पहुंचे पुलिस के पास

तीन घंटे पर घर में सुरक्षित होने का देना पड़ता था संदेश, सीबीआई अधिकारी बनकर रखा दहशत में



हाटा (कुशीनगर)। पत्नी के गहने बिक गए, रिश्तेदारों से कर्ज लेना पड़ा लेकिन गिरफ्तारी और संपत्ति फ्रीज होने के डर ने 65 वर्षीय डॉक्टर को इस कदर जकड़ लिया कि वह ठगों के इशारे पर पैसे जमा करते रहे। जालसाजों ने डॉ. शिवदत्त सिंह से 35.75 लाख रुपये ऐंठने के लिए ऐसा जाल बुना कि डॉक्टर घर से कम निकलने लगे और किसी से इसकी चर्चा भी नहीं की। कंगाल होने के बाद वह पुलिस के पास पहुंचे।
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हाटा कोतवाली क्षेत्र के बतरौली गांव निवासी डॉक्टर पहले मुंबई में निजी प्रैक्टिस करते थे। 20 सितंबर को फोन करने वाले ने खुद को मोबाइल कंपनी का कर्मचारी बताकर बंगलूरू में प्राथमिकी दर्ज होने की जानकारी दी। इसके बाद कथित सीबीआई अधिकारी ने मानव और महिला तस्करी के मामले में फंसाने की धमकी दी। ठगों ने दावा किया कि गिरफ्तार आरोपी के पास डॉक्टर के दस्तावेज मिले हैं और उनके खाते से भी करोड़ों रुपये का लेनदेन का मामला सामने आया है।



आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले 25.75 लाख रुपये सिक्योरिटी मनी जमा करने को कहा। रकम वापस मिलने का भरोसा भी दिया। धमकियों से सहमे डॉक्टर ने पत्नी के गहने बेचकर और रिश्तेदारों से कर्ज लेकर 25 सितंबर को रकम जमा कर दी। दो दिन बाद फिर 10 लाख रुपये मांगे गए। डॉक्टर ने 30 सितंबर को यह रकम भी दे दी। वह कई दिनों तक मानसिक तनाव में रहे। हर तीन घंटे पर घर में सुरक्षित होने का संदेश देना भी उनकी मजबूरी बन गई थी। ठगों ने किसी को जानकारी देने और अनजान लोगों के फोन उठाने से भी मना किया था। कंगाल होने के बाद बेटी से पूरी बात डॉक्टर ने बताई तो वह पुलिस के पास भेजा।

सीओ सिटी राकेश प्रताप सिंह ने साइबर ठगी के प्रति सतर्क रहने की सलाह देते हुए बताया कि



-डिजिटल गिरफ्तारी जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं: पुलिस, सीबीआई या अन्य जांच एजेंसियां वीडियो कॉल पर किसी को डिजिटल तरीके से गिरफ्तार नहीं करतीं। ऐसी धमकी मिलने पर घबराएं नहीं।

अनजान कॉल पर भरोसा न करें: फोन करने वाला खुद को सीबीआई, पुलिस, कस्टम या किसी अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताए तो उसकी बातों में न आएं। उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें।



गिरफ्तारी की धमकी से न डरें: मुकदमे में फंसाने, जेल भेजने या परिवार के सदस्यों को गिरफ्तार करने की धमकी देकर पैसे मांगे जाएं तो सतर्क हो जाएं।





सिक्योरिटी मनी के नाम पर पैसे न दें: जांच से बचाने, मुकदमा खत्म कराने या संपत्ति फ्रीज होने से रोकने के नाम पर किसी निजी खाते में रकम जमा न करें।

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बैंक खाते और निजी जानकारी साझा न करें: ओटीपी, एटीएम पिन, पासवर्ड, आधार की जानकारी या बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें।





परिवार से संपर्क न तोड़ें: ठग अक्सर पीड़ित को किसी से बात न करने और हर कुछ घंटे में अपनी लोकेशन बताने का दबाव बनाते हैं। ऐसी हिदायतों से सावधान रहें और परिजनों को तुरंत जानकारी दें।

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वीडियो कॉल पर दबाव में न आएं: वर्दी पहनकर या फर्जी पहचान पत्र दिखाकर बात करने वाला व्यक्ति असली अधिकारी हो, यह जरूरी नहीं है। वीडियो कॉल पर दस्तावेज या पैसे न भेजें।

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आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करें: किसी मुकदमे या जांच की जानकारी मिलने पर संबंधित पुलिस थाने या एजेंसी के आधिकारिक संपर्क माध्यम से पुष्टि करें। कॉल करने वाले के दिए नंबर पर ही भरोसा न करें।





ठगी होने पर तुरंत शिकायत करें: पैसे ट्रांसफर हो गए हों तो तत्काल बैंक से संपर्क कर लेनदेन रोकने या खाते में रकम फ्रीज कराने का अनुरोध करें। साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।





कॉल और लेनदेन के सबूत सुरक्षित रखें: मोबाइल नंबर, व्हाट्सएप चैट, कॉल रिकॉर्डिंग (यदि उपलब्ध हो), बैंक ट्रांजेक्शन आईडी और भुगतान की रसीदें सुरक्षित रखें। शिकायत के समय ये सबूत जांच में मदद कर सकते हैं।
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