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Kushinagar News: डीजे के शोर ने छीन ली रात की नींद

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पडरौना डोल मेला में रात भर बजे डीजे। संवाद
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- घर के पास से गुजरने पर दहलता है दिल, दरवाजा बंद करने के बाद भी कमरे तक पहुंच रही गूंज
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-तेज आवाज बना रहा लोगों को बीमार, डोल मेले में तेज आवाज वाले डीजे बजाने की होड़

संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर आयोजित डोला मेला के दौरान एक बार फिर कानफोड़ू डीजे बजने लगे हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर जिला मुख्यालय समेत जिले के सभी कस्बे और छोटे बड़े बाजारों में इन दिनों डोला मेला का आयोजन हो रहा है। जिले में अधिकांश डोला मेला रात में ही होता है। मेला रात नौ बजे के बाद शुरू होता है। ऐसे में डीजे के शोर से लोगों की नींद उड़ गई है। उनके सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है।
शोर से हृदय के मरीजों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है। डीजे की तेज आवाज के चलते घरों में भी कंपन होने लग रहा है। डीजे की तेज आवाज ही डोल मेले में निकलने वाले आखड़ों की पहचान बनी है। इस लिए अखाड़े में शामिल युवकों में डीजे तेज आवाज में बजाने की होड़ रहती है। 14 अगस्त से जिले में डोल मेले का दौर शुरू हो गया, यह अगस्त के अंतिम सप्ताह तक चलेगा।
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तमकुहीरोड से जिले में डोल मेले का आयोजन शुरू होता है। यह जिले के सभी छोटे-बड़े शहरों के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के चौक चौराहों पर आयोजित होता है। डोल मेला भ्रमण के दौरान तेज आवाज में साउंड बजाना प्रचलन में आ गया है। शहर में भ्रमण के दौरान वाहनों पर बड़े-बड़े डीजे बॉक्स रखकर तेज ध्वनि में बजाए जाते हैं। जिले में आयोजित होने वाला अधिकतर डोल मेले का शुभारंभ रात नौ बजे के बाद शुरू होता है। जो सुबह करीब आठ बजे तक रहता है।
इस दौरान पूरी रात डीजे बजता है, जिसके शोर के चलते जिस रास्ते डोल गुजरता है वहां के लोग परेशान हो जाते हैं। हालत यह है कि शहर में रहने वाले लोग डीजे के शोर के चलते ठीक से सो भी नहीं पा रहे हैं, और बीमार हो रहे हैं।
शहर के अजय कुमार सिंह, सुनील मद्धेशिया, सुनील मोदनवाल, काशी मद्धेशिया आदि ने बताया कि उनके घर के रास्ते से ही डोल गुजरता है। इस दौरान पूरी रात तक डीजे का शोर होता है। इससे सोने में दिक्कत होती है, नींद पूरी नहीं होती है। जबकि गाइड लाइन के अनुसार डीजे 45 डिसेबल से तेज नहीं बजाया जा सकता है। मगर संचालक 200 डिसेबल तक बजा रहे हाेते हैं। इसके शोर से कान की समस्या उत्पन्न हो रही है। हालत है कि 10 अगस्त के पहले मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में प्रतिदिन 80 से 100 मरीज कान की समस्या को लेकर पहुंच रहे थे, लेकिन करीब एक सप्ताह से कान के मरीजों की समस्या 150 से 200 तक हो गई। उन्हें सुनने में दिक्कत आ रही है और कान से पानी भी आ रहा है।


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60 डेसिबल से अधिक आवाज स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
मेडिकल कॉलेज की ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. हर्षिता ने बताया कि सामान्यतः 60 डेसिबल तक की आवाज ठीक मानी जाती है। इससे ऊपर की आवाज परेशानी का कारण बन सकती है। उन्होंने बताया कि 30-40 डेसिबल तक की आवाज फुसफुसाहट या शांत कमरे की आवाज के बराबर होती है। इसे सुरक्षित माना जाता है। 60 डेसिबल तक की आवाज सामान्य बातचीत के स्तर के बराबर होती है। इसे भी सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इससे ऊपर की आवाज स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होती है। उन्होंने बताया कि 70 से 80 डेसिबल की आवाजें तेज होती हैं। ऐसी आवाज लगातार सुनने पर व्यक्ति की सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकती हैं। 90 डेसिबल से ऊपर की आवाज बहुत तेज होती हैं। ऐसी आवाज सुनने की क्षमता को तुरंत नुकसान पहुंचा सकती है।
डीजी की आवाज करीब 200 डेसिबल होती है। ऐसी आवाज केवल कान बल्कि हृदय रोगियों के लिए भी खतरनाक है।

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डीजे की तेज आवाज हृदय रोगियों के लिए खतरनाक हो सकती है। तेज आवाज से हृदय गति बढ़ सकती है, जिससे तनाव, चिंता और डर बढ़ सकता है। इससे खून गाढ़ा हो सकता है, जिससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

- डॉ. धनंजय मिश्रा, डीएम कार्डियोलॉजी

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डीजे की तेज आवाज से बच्चों पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। तेज आवाज बच्चों में श्रवण शक्ति का नुकसान पहुंचा सकते हैं। नींद में खलल होने पर बच्चों के व्यवहार में भी बदलाव आता है। बच्चों का श्रवण तंत्र बहुत संवेदनशील होता है, तेज आवाज से उनके कानों को नुकसान हो सकता है, जिससे आगे चलकर सुनने में समस्याएं आ सकती हैं। इसके अलावा, तेज आवाज बच्चों में तनाव, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी का कारण बन सकती है।

- डॉ. अनवर, बाल रोग विशेषज्ञ।

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पडरौना शहर में सोमवार की रात से मंगलवार की सुबह तक डोल मेला का आयोजन हुआ था। इस दौरान आयोजक ट्रॉलियों पर दस-दस डीजे बजा रहे थे। मेन रोड से करीब 50 मीटर दूर घर होने के बाद भी डीजे की आवाज घर में गूंजने लगा। इसके चलते जागकर रात गुजारनी पड़ी।

- पिंटू सिंह, निवासी, मुन्ना कॉलोनी।

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डोला मेला के दौरान बच्चों की जिद पर मेला घूमने गया था। जब भी कोई डीजे सामने से गुजर रहा था तब हृदय की धड़कन बढ़ जा रही थी। डीजे की तेज आवाज के चलते आधे घंटे बाद ही घर चला गया।

- राहुल चौबे, बावली चौक।

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सुभाष चौक से करीब 20 मीटर दूरी पर घर है। रात दस बजे के बाद से ही डीजे का शोर शुरू हो गया। कभी-कभी तो ऐसा लग रहा था कि घर के पास डीजे बज रहा है। रात भर जाग कर सुबह हुआ है।
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- अजीत सिंह, ओंकारवाटिका।

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सुभाष चौक पर ही आभूषण की दुकान है। दोस्तों के साथ डोल मेला देखने के लिए दुकान पर ही रुक गया। रात नौ बजे से डीजे का शोर शुरू हो गया। जैसे-जैसे समय आगे बढ़ रहा था, वैसे-वैसे डीजे की शोर तेज होते जा रहा था। किसी तरह रात 12 बजे तक मेला में था, जब तेज आवास सहन नही हुआ तो घर चला गया।

- लालजी प्रसाद
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