लोकरंग कार्यक्रम में मंचासीन अतिथि। संवाद
फाजिलनगर (कुशीनगर)। प्रसिद्ध वैज्ञानिक और शायर गौहर रजा ने कहा कि आज विज्ञान पर आक्रमण बढ़ रहा है। विज्ञान की शब्दावली में विज्ञान पर हमला बोला जा रहा है। नफरत और अंधविश्वास को फैलाकर समाज में विभाजन पैदा किया जा रहा है। इस खतरे को समझ कर उसका मुकाबला करने की जरूरत है। वह जोगिया जनूबी पट्टी में आयोजित लोकरंग-2025 के दूसरे दिन मिथक, लोक संस्कृति और विज्ञान विषय पर आयोजित गोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि धर्म के अंदर विज्ञान तलाशना और विज्ञान के अंदर धर्म तलाशना गलत है। विज्ञान आज का सच है और वह नए-नए खोजों से अपने को आगे बढ़ाता रहता है। उन्होंने संस्कृति के धरातल पर विज्ञान को समझने पर जोर देते हुए कहा कि मिथकों का कण तिहाड़ बहुत पुराना है। हमें परंपराओं में प्रगतिशील तत्व भी हैं जिसे अपनाना चाहिए। अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि प्रो. दिनेश कुशवाहा ने कहा कि अभिजन संस्कृति ने लोकसंस्कृति की उपेक्षा की है और उसका उपहास किया है। अभिजनों ने लोक संस्कृति को गंवारों की संस्कृति और ग्राम्य संस्कृति कहा है। लोक संस्कृति वंचित वर्गों की संस्कृति है। लोकसंस्कृति में वर्चस्व का प्रतिरोध है। इसलिए उसे संवर्धित करते हुए उसे जनसंस्कृति तक ले जाने की कोशिश करनी है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रामनरेश राम ने कहा कि लोकरंग आम जन का महायज्ञ है।