पडरौना। कभी चीनी का कटोरा कहे जाने वाले कुशीनगर जिले में पहली बार किसी चीनी मिल के एजीएम सहित तीन अधिकारियों पर फर्जीवाड़ा और आवश्यक वस्तु अधिनियम में मुकदमा दर्ज हुआ है। इस कार्रवाई के बाद यह बात साबित हो गई है कि किसान चीनी मिलों के हाथों सिर्फ घटतौली में ही नहीं, सप्लाई टिकटों में भी गड़बड़ी के कारण छले जा रहे हैं, क्योंकि सप्लाई टिकट बांटने में किसी तरह का गड़बड़झाला न हो, इसीलिए केन यूनियन की मुहर अनिवार्य रूप से उस पर लगाई जाती है, लेकिन इसका फर्जीवाड़ा भी होने लगा है। रही बात गन्ना क्रशरों की, तो वहां गन्ना के तौल से लेकर गुड़ में मिलावट या अन्य किसी भी गड़बड़ी की जांच का अधिकार गन्ना विभाग को नहीं है। इसलिए क्रशरों के खिलाफ कोई कार्रवाई ही नहीं होती।
वैसे तो गन्ना किसानों को सप्लाई टिकट का आवंटन चीनी मिलों के जिम्मे है, लेकिन उन्हें गन्ना आवंटित करने तथा सप्लाई टिकटों पर मुहर केन यूनियन की होती है, ताकि चीनी मिलें सप्लाई टिकट या गन्ना तौल के नाम पर किसानों के साथ कोई धोखा न कर सकें। डीएम के निर्देश पर 23 दिसंबर को मिल के यार्ड में पर्चियों की जांच करने वाले कप्तानगंज के एसडीएम त्रिभुवन सिंह और डीसीओ वेदप्रकाश सिंह ने बताया था कि सप्लाई टिकटों पर केन यूनियन की फर्जी मुहर लगाकर गन्ना खरीदने की शिकायत की पुष्टि हुई थी, जिसके आधार पर एक जनवरी को मुकदमा दर्ज कराया गया।
अभी तो यह एक चीनी मिल का मामला है। लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह जनपद की अन्य चार चीनी मिलों की गहनता से जांच करा दी जाए तो चीनी मिलों में घटतौली के अलावा सप्लाई टिकट आवंटन में गड़बड़ी तथा इस तरह की और भी कमियां उजागर हो सकती हैं, जिसे किसान या आम लोग नहीं देख पाते अथवा आवाज नहीं उठा पाते।