यूजीसी की ओर से कस्बे के श्रीनाथ संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यान माला का रविवार को समापन हुआ। तीसरे दिन के मुख्य वक्ता गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉक्टर अनिल राय ने महात्मा गांधी के दर्शन और बाबा साहब डॉक्टर भीम राव अंबेडकर के सिद्धांतों पर संयुक्त रूप से प्रकाश डाला।
श्रीनाथ संस्कृत महाविद्यालय के सभागार में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नई दिल्ली के सहयोग से गांधी और अंबेडकर दर्शन पर आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला के तीसरे दिन रविवार को बतौर मुख्य वक्ता दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर के हिन्दी विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर अनिल राय ने कहा कि अंबेडकर को दलितों के उत्थान तक जो सीमित किया गया है वह उनके साथ नाइंसाफी है।
अंबेडकर और महात्मा गांधी दोनों ने सर्वसमाज के हितों के लिए संघर्ष किया है।
डॉक्टर अंबेडकर स्वयं दलित परिवार से थे। वह जानते थे कि आजादी मिलने के बाद वंचितों को समाज में स्थान नहीं मिला तो देश टुकड़ों में बंट जायेगा। गांधीजी भी उनके विचारों से प्रभावित थे।
जिसका नतीजा रहा कि उन्हें संविधान निर्माण सभा का अध्यक्ष बनाया गया। विषय प्रर्वतन करते हुए डॉ. मुन्ना तिवारी अध्यक्ष हिन्दी विभाग महावीर पीजी कॉलेज फाजिलनगर ने कहा कि शोषित, पीड़ित, आहत समाज को गौतम बुद्ध ने अवश्य ही सहारा दिया था, लेकिन आधुनिक युग में यह कार्य डॉक्टर अंबेडकर ने करके बताया कि देश तभी मजबूत बनेगा जब सर्व समाज का विकास होगा।
अध्यक्षीय संबोधन में माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री जगदीश पांडेय ने कहा कि कोई भी देख अखंड तभी रह सकता है जब वहां सामाजिक एकता स्थापित रहेगी। प्रथम सत्र में पावानगर डिग्री कॉलेज के प्रवक्ता डॉक्टर मुन्ना तिवारी ने कहा कि गांधी का जीवन ही उनका दर्शन है।
आगन्तुकों के प्रति आभार महाविद्यालय प्रबन्ध समिति के प्रबंधक अगिभनवेश मणि और स्वागत प्रबन्ध समिति के मंत्री गंगेश्वर पाण्डेय, प्राचार्य डॉक्टर रामसुभाष पांडेय ने संयुक्त रूप से किया। संचालन प्रवक्ता नंदा पांडेय ने किया। संयोजक गांधी अध्ययन केंद्र के निदेशक मोहन पांडेय और अंबेडकर अध्ययन केंद्र के निदेशक सतीश शुक्ला ने व्याख्यानमाला में आने वाले विद्धानों के प्रति संयुक्त रूप से आभार जताया।