पडरौना। दिसंबर में ठंड बढ़ने के बाद अब विभिन्न बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर दिन 70 से अधिक सांस से पीड़ित मरीज उपचार कराने पहुंच रहे हैं। ओपीडी के अलावा इन दिनों जनरल वार्ड में भी सांस के मरीजों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है।
जनरल वार्ड में हर दिन सांस से पीड़ित 20 मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में सांस के मरीज सावधानी बरतें। दिक्कत हो तो लापरवाही न करें। डॉक्टर की परामर्श लेने के बाद दवा शुरू करें। कुशीनगर मेडिकल कॉलेज में इन दिनों सर्दी बढ़ने के साथ ही सांस के मरीजों की ओपीडी संख्या 70 से अधिक पहुंच गई है। मंगलवार को ओपीडी में विभिन्न बीमारियों से पीड़ित 1266 मरीज उपचार कराने पहुंचे थे। इसमें 72 मरीज ऐसे थे, जो सांस लेने में हो रही तकलीफ से पीड़ित थे। चेस्ट फिजिशियन डॉ. उपेंद्र चौधरी का कहना है कि ठंड के कारण लगातार मरीजों की संख्या बढ़ रही है। विशेषकर बुजुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण वे अस्थमा की चपेट में आते हैं। इस मौसम में बच्चों और बुजुर्गाें के साथ सांस रोगियों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि ठंड के समय सांस के रोगियों को काफी परेशानी होती है। इस मौसम में हवा शुष्क हो जाती है। यह वायुमार्ग को संकीर्ण करने के साथ ही सांस लेने में कठिनाई और फेफड़ों में जलन पैदा कर सकती है। इसके कारण सांस के मरीजों की ओपीडी बढ़ी है।
डॉ. चौधरी का कहना है कि तापमान में कमी आने पर अपने घर में ही रहने का प्रयास करना चाहिए। यदि आपको घर से बाहर जाना भी पड़े तो सांस लेने से पहले हवा को गर्म करने के लिए अपने नाक और मुंह को स्कार्फ से ढक लें। सर्दियों में ज्यादा तरल पदार्थ का सेवन करें। इससे फेफड़ों में जमा बलगम पतला रहेगा। शरीर से उसे बाहर निकालना आसान होगा। जो भी व्यक्ति बीमार नजर आए, उससे दूरी बनाए रखने का प्रयास करें।े