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Kushinagar News: महंगा हुआ डीजल फिर भी डिपो से कटौती, किल्लत बरकरार

Thu, 28 May 2026 02:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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पडरौना। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में हुई वृद्धि के बाद भी डिपो से कटौती के चलते डीजल की किल्लत बरकरार है। बढ़ी कीमत पर भी जरूरत के मुताबिक डीजल नहीं मिल पा रहा है। आपूर्ति और खपत की इस मारामारी में सबसे ज्यादा फजीहत जरूरतमंदों व पंप संचालकों की हो रही है। पंप संचालकों व कर्मियों को भी लोगों के सवालों का सामना करना पड़ रहा है। मौजूदा समय में ग्रामीण इलाकों में जोताई के काम में कुछ नरमी आई है, लेकिन इस समय धान की नर्सरी (बेहन) डालने और फसलों की सिंचाई का मुख्य कृषि कार्य जारी है। ऐसे में डीजल नहीं मिलने से किसानों और ट्रैक्टर संचालकों के सामने पहिए संचालित करने के लिए पंपों का इधर से उधर चक्कर लगाना पड़ रहा है।
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गौरतलब है कि नाम न छापने की शर्त पर पंप संचालकों का कहना है कि तेल कंपनियों और डिपो की ओर से खपत के मुताबिक डीजल की खेप नहीं भेजी जा रही है। हर टैंकर के लिए लंबे समय का इंतजार करना पड़ रहा है। पंपों पर ईंधन के अभाव में सन्नाटा व नो फ्यूल के बोर्ड टंग रह रहे हैं। तेल नहीं होने से जब ट्रैक्टर संचालक और किसान वापस लौटते हैं, तो पंप कर्मियों पर नाराजगी जताते हुए वापस चले जाते हैं। ईंधन के अभाव के चलते पंपों पर पहुंच रहे लोगों को समझाना बहुत ही मुश्किल साबित हो रहा है।
दूसरे जिले महराजगंज से डीजल के लिए पहुंच रहे लोगों के चलते भी कुछ परेशानी हो रही है। जबकि तेल कंपनियां पेट्रोल पंप स्थापना के दौरान उस क्षेत्र की मांग व जरूरत को देखते हुए आपूर्ति करती हैं। ऐसे में जब दूसरे जिले से तेल के लिए लोग पहुंचेंगे तो यहां की सीमित आपूर्ति के चलते किल्लत और बढ़ेगी। एक पंप संचालक के अनुसार,बीते दो दिन पहले महराजगंज जिले के तमाम लोग कुशीनगर के अलग-अलग पेट्रोल पंपों पर डीजल के लिए पहुंचे थे। जहां रात में पंपों पर सो कर रात व्यतीत किए और फिर सुबह जब टैंकर आया तो डीजल लेकर वापस लौट गए। ऐसी तस्वीरें रामकोला व कप्तानगंज क्षेत्र में मिली थीं।
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ट्रैक्टर संचालक व किसान बोले
सरकार ने डीजल की कीमत तो बढ़ा दिया, लेकिन आपूर्ति में अब पुराने जैसे ही हालात हैं। परेशानी कम नहीं हुई है। ऐसे में आपूर्ति को सामान्य किए जाने के लिए कटौती को खत्म कर पहले से जैसे आपूर्ति बहाल करने की जरूरत है,ताकि पंपों पर डीजल के लिए कतार में लगकर घंटों इंतजार करने से निजात मिल जाए। -सत्यप्रकाश त्रिपाठी, ट्रैक्टर मालिक
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जोताई का काम तो जैसे-तैसे कुछ हद तक निपट गया। धान की नर्सरी (बेहन) डालने का समय है। अन्य फसलों की सिंचाई के लिए पंपिंग सेट चलाने पड़ते हैं। अगर समय पर डीजल नहीं मिला, तो नर्सरी सूख जाएगी और आगे पूरी फसल चक्र प्रभावित हो जाएगी। हम खेतों को संभालें अथवा दिन भर पंपों पर कतार में खड़े रहें। -दिग्विजय सिंह, किसान
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कोट:-
ईंधन की चली आ रही किल्लत में पहले से सुधार हो रहा है। जिले में सिर्फ नौ पेट्रोल पंप ही ईंधन के अभाव में सूखे पड़े हुए हैं। शेष सभी पर ईंधन की उपलब्धता है। प्रशासन की ओर से लगातार जायजा लिया जा रहा है। किसी तरह की आ रही दिक्कतों को तेल कंपनियों के अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर दूर किया जा रहा है। -कृष्ण गोपाल पांडेय, जिला पूर्ति अधिकारी,कुशीनगर
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