कसया। बरवा जंगल में श्री राम कथा के दूसरे दिन संत यशोदा नंदन रामायणी ने शिव प्रसंग के अंतर्गत सती के संशय का वर्णन किया। कहा कि भगवान शिव और सती कुंभज ऋषि से राम कथा सुनकर लौट रहे थे। यह त्रेता युग की घटना है। इसी दौरान श्रीराम और लक्ष्मण सीता के वियोग में दंडकारण्य में विलाप कर रहे थे। शिव ने अखिल ब्रह्मांड के नायक श्रीराम को पहचान कर दूर से ही दंडवत प्रणाम किया। किंतु सती ने प्रभु राम को ब्रह्म मानने से इन्कार कर दिया और उनकी परीक्षा लेने का निश्चय किया।
सती ने सीता का वेश बनाया, लेकिन राम ने उन्हें पहचान कर प्रणाम किया और वन में भगवान शिव के बिना अकेले ही विचरण करने का कारण पूछा। सती वहां से भागीं और शिव के पास पहुंचीं। शिव के पूछने पर झूठ बोल दिया कि मैंने प्रभु की कोई परीक्षा नहीं ली। मैं तो आपकी तरह प्रणाम करके चली आई। मगर भगवान शिव ने ध्यान अवस्था में सब देख लिया था। मां सीता का वेश बनाने के कारण उन्होंने मन ही मन सती के त्याग का संकल्प ले लिया। रामायणी जी ने कहा कि पार्वती जी का जन्म राजा हिमाचल के यहां हुआ। पार्वती शिव से विवाह करने का संकल्प लेती हैं। इस अवसर पर डा खगेंद्र प्रताप सिंह, उदय नारायण सिंह, कमल किशोर कुशवाहा,बिरेश सिंह, सभासद सुभावती देवी, प्रेम यादव, मंजीत पाठक, सत्येन्द्र सिंह आदि मौजूद रहे।