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Kushinagar News: मां मैनपुर कोटेश्वरी देवी के दरबार में उमड़े श्रद्धालु

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नवरात्र में नौ दिनों तक लगता है भक्तों का तांता, मल्ल वंश की आराध्य देवी के रूप में विख्यात है मंदिर
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सपहा। शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन रविवार को कसया तहसील क्षेत्र के मैनपुर गांव में तीनों ओर से कंदराओं से घिरा मां मैनपुर कोटेश्वरी देवी मंदिर मां में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह से ही माता के दर्शन-पूजन के लिए भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।
हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं ने कतारबद्ध होकर माता के पिंडी स्वरूप का दर्शन किया और विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए कसया के थानाध्यक्ष इत्यानंद पांडेय पुलिस बल के साथ मंदिर परिसर पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। नवरात्र के दौरान मां मैनपुर कोटेश्वरी देवी का दरबार श्रद्धालुओं से गुलजार रहता है। भक्त नौ दिनों तक कलश स्थापना कर मां भगवती के नौ स्वरूपों की आराधना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से माता के दरबार में पहुंचने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। नवरात्र शुरू होते ही मंदिर में दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
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मैनपुर कोटेश्वरी देवी मंदिर के पुजारी मोहन चंद उर्फ मौनी बाबा बताते हैं कि धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व क्षेत्र में विशेष स्थान रखता है। स्थानीय मान्यताओं और प्रचलित ऐतिहासिक वर्णनों के अनुसार, यह स्थल प्राचीन काल में मल्ल वंश से जुड़ा रहा है। ऐतिहासिक कुशीनारा, जिसे वर्तमान में कुशीनगर के नाम से जाना जाता है, मल्ल वंश की राजधानी थी। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, मैनपुर को मल्ल वंश ने अपनी छावनी बनाया था। मंदिर का अतीत पांडवों के अज्ञातवास और उनकी देवी आराधना से जुड़ी कथाओं के लिए भी जाना जाता है। उन्होंने बताया कि मां मैनपुर कोटेश्वरी देवी को मल्ल वंश की उद्धारक देवी के रूप में माना जाता है। प्रचलित ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, किसी आपदा के समय या युद्ध के लिए प्रस्थान करने से पहले माता की पूजा-अर्चना की जाती थी। इसके बाद ही संकट के समाधान अथवा युद्ध की तैयारी से जुड़ा निर्णय लिया जाता था। मल्ल वंश और उसके राज्य के लोगों की रक्षा तथा कल्याण के लिए माता की कृपा को महत्वपूर्ण माना जाता था।
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