तमकुहीरोड। गंगा अवतरण दिवस पर रविवार को श्रद्धालुओं ने बांसी और गंडक नदी में आस्था की डुबकी लगाई। नदियों की पूजन कर दानपुण्य किया। मान्यता है कि इसी दिन महादेव की जटाओं से निकल कर माता गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं। तभी से उनकी अविरल धारा मानवता के कल्याण के लिए बहती चली आ रही है।
सेवरही क्षेत्र में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा का पर्व बड़े आस्था व भक्ति भाव से मनाया जाता है। मान्यता है कि राजा भगीरथ ने साठ हजार पुरखों को तारने के लिए ब्रह्मा व महादेव की कठोर तपस्या की थी। इसके बाद माता गंगा महादेव की जटाओं से निकल कर धरती पर अवतरित हुई थीं। रविवार को शिवाघाट पर मेले जैसा दृश्य था। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बांसी और गंडक नदी में आस्था की डुबकी लगाई और नदी का पूजन कर दीपदान और दानपुण्य किया। पंडित नागेंद्रनाथ द्विवेदी ने कहा कि गंगा अनंत काल से धरती पर बह रही हैं। उनका जल मोक्षदायिनी माना गया है। आज के दिन नदियों में पवित्र स्नान दान से सारे पाप मिट जाते है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।