फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kushinagar News: डिप्टी सीएमओ ने भुगतान के लिए किया डिमांड, डीएम ने बैठाई जांच

Sat, 24 Jan 2026 01:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
पडरौना। सीएमओ कार्यालय में एनएचएम व दूसरे मद से करीब ढाई साल पहले अलग-अलग फर्मों से उपकरणों की बड़े पैमाने पर खरीद की गई थी। इसके भुगतान के लिए चार्ज में रहे डिप्टी सीएमओ ने शासन को डिमांड भेजा था। इसकी जानकारी मिलने पर डीएम ने जांच बैठा दी है।
विज्ञापन

पूर्व में रिटायर्ड होने के बाद सीएमओ ने इसके भुगतान के लिए काफी प्रयास किए, इसकी भनक तत्कालीन डीएम विशाल भारद्वाज को लगी तो जांच कराई। पता चला कि खरीदारी सिर्फ कागजों में हुई है। सीएचसी, पीएचसी पर एक भी उपकरण नहीं पहुंचे हैं। इसके बाद भुगतान पर रोक लग गई। बीच में कई सीएमओ ने चार्ज लिया, लेकिन किसी ने पूर्व में करीब तीन करोड़ रुपये से उपकरणों की हुई खरीदारी का भुगतान नहीं किया।
सीएमओ डॉ. चंद्रप्रकाश ने चार्ज लिया तो भुगतान वाली फाइल पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। पिछले महीने सीएमओ चार दिन के लिए अवकाश पर गए तो डिप्टी सीएमओ आरडी कुशवाहा चार्ज पर थे। इसी बीच शासन को बकाया भुगतान के लिए डिमांड करते हुए पत्र लिख दिया। इसी डिमांड की कॉपी लेकर ठेकेदार हाईकोर्ट चला गया और हाईकोर्ट ने भुगतान करने का आदेश दे दिया। इसके बाद डिप्टी सीएमओ की भूमिका संदिग्ध मानते हुए डीएम ने भुगतान पर रोक लगा दिया और सीडीओ को जांच का निर्देश दिया है। पूर्व में हुई उपकरणों की खरीदारी का रिकार्ड खंगाला जा रहा है।
विज्ञापन

सीएमओ कार्यालय से हुई उपकरणों की खरीदारी में धांधली का मामला नया नहीं है। करीब तीन करोड़ रुपये की खरीदारी का भुगतान कराने के लिए कई बार बीच में यहां से हाल ही में रिटायर्ड हुए एक सीएमओ के दबाव में प्रयास किया गया, लेकिन पूर्व में कराए गए जांच में बिना खरीदारी भुगतान कराने का मामला प्रकाश में आने के बाद कोई सीएमओ भुगतान करने को तैयार नहीं हुए।
रिटायर्ड हो चुके सीएमओ ठेकेदारों का भुगतान कराने के लिए काफी प्रयासरत हैं। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को भी हो चुकी है। पिछले महीने सीएमओ डॉ. चंद्रप्रकाश चार दिन के लिए अवकाश पर गए थे, चार्ज पर डिप्टी सीएमओ डॉ. आरडी कुशवाहा रहे। इस दौरान ठेकेदारों को भुगतान के लिए शासन को डिमांड लेटर बनाकर भेज दिया। इसमें सीएमओ कार्यालय के दो बाबू की भूमिका भी संदिग्ध है।
जानकारों की मानें तो सीएमओ के चार्ज पर रहे डिप्टी सीएमओ को वित्तीय मामलों में डिमांड करने या भुगतान का कोई अधिकार नहीं है। ठेकेदार डिमांड लेटर लेकर हाईकोर्ट चला गया। हाईकोर्ट ने जब भुगतान के लिए आदेश किया तो सीएमओ ने डीएम से पूरी बात बताई। डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भुगतान पर रोक लगा दिया और सीडीओ को जांच कराने का निर्देश दिया।
सीडीओ के साथ एएसडीएम मोहम्मद जफर समेत तीन सदस्यीय टीम जांच कर रही है। ठेकेदार की ओर से भुगतान के लिए लगाया गया बिल बाउचर और उस समय खरीदे गए उपकरणों की सूची बनाई जा रही है। शुक्रवार को पूरे दिन सीएमओ मातहतों के साथ स्टोर रूम में रिकार्ड खंगालने में व्यस्त रहे। सीएमओ कार्यालय में तैनात कुछ बाबू और संविदाकर्मी अभी भी रिटायर्ड सीएमओ के संपर्क हैं और कार्यालय की गतिविधियों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इससे विभागीय कार्य प्रभावित हो रहा है।
सीडीओ वंदिता श्रीवास्तव ने कहा कि यह मामला गंभीर है। डीएम के आदेश पर जांच कराई जा रही है। जिन उपकरणों की खरीद हुई है। उसकी जानकारी कराई जा रही है। इसके लिए टीम गठित कर दी गई है। जब तक जांच पूरी नहीं होगाी, तब तक भुगतान पर रोक लगा दी गई है। इसमें कई लोगों की भूमिका संदिग्ध मिल रही है। साक्ष्य मिलने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें