दुदही (कुशीनगर)। विशुनपुरा थाना क्षेत्र के दुदही सीएचसी में प्रसव के बाद के बाद प्रसूता की तड़प-तड़प की जान चली गई, लेकिन एएनएम अपने आवास से बाहर नहीं निकली। परिजनों के शोर मचाने पर एएनएम बाहर निकली तो बाहर से इंजेक्शन मंगवाया, जिसे लगाने के बाद आशा से बिना रेफर पर्ची बनाए मेडिकल कॉलेज लेकर जाने की बात कही।
आशा कार्यकर्ता परिजनों के साथ प्रसूता को लेकर मेडिकल कॉलेज कुशीनगर पहुंची तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने मौत की वजह अधिक रक्तस्राव होना बताया। नवजात की तबीयत बिगड़ने पर परिजनाें ने कसया के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया है।
परिजनों का आरोप है कि गर्भवती को भर्ती करने के लिए एएनएम ने 500 रुपये लिया और प्रसव होने के बाद बार-बार कहने के बाद भी प्रसूता को देखने तक नहीं आई, जिससे उसकी मौत हो गई। प्रसूता के परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया है। इसका वीडियो ने किसी ने एक्स पर पोस्ट किया है। इसमें डीएम और सीएमओ कुशीनगर और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक को भी शामिल किया है। इसके बाद शाम को दुदही सीएचसी के प्रभारी डॉ. संदीप जांच के लिए पहुंचे और पीड़ित परिवार का बयान दर्ज किया। दुदही ब्लॉक के कोकिल पट्टी निवासी सुभावती (20) पत्नी चंदन बैठा को पहला बच्चा होना था। रविवार की शाम को उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो परिजन आशा कार्यकर्ता उर्मिला देवी को बताया। आशा कार्यकर्ता एंबुलेंस से सुभावती को लेकर दुदही सीएचसी पर पहुंची। आशा कार्यकर्ता और चंदन का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात एएनएम ममता चौहान ने सुभावती को भर्ती करने के लिए 500 रुपये लिए और वहां मौजूद दो महिला स्वास्थ्यकर्मियों ने 50-50 रुपये वसूले। एएनएम ने इंजेक्शन लगाने के बाद कैंपस में ही सरकारी आवास पर दूसरे मंजिल पर चली गई। प्रसव पीड़ा तेज होने पर आशा कार्यकर्ता के बुलाने पर कमरे से आई। प्रसव कराने के बाद आवास पर चली गई।
आशा कार्यकर्ता और सुभावती की सास ने बताया कि प्रसव के बाद रक्तस्राव अधिक होने पर प्रसूता की तबीयत बिगड़ने लगी और असहाय पीड़ा होने लगा। आशा कार्यकर्ता और प्रसूता की सास चार बार एएनएम के आवास पर बुलाने के लिए गई, लेकिन वह कमरे से बाहर नहीं निकली। तीन घंटे बाद आशा कार्यकर्ता ने फोन की तो वह बोली कि रात में कमरे से नहीं निकलूंगी, दूसरे जगह तुम लोग लेकर चली जाओ।
यह सुनने के बाद परिजन नाराज हो गए और एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज बिना रेफर किए ही लेकर चले गए, मेडिकल कॉलेज में पहुंचने के बाद डॉक्टर ने देखने के बाद मृत घोषित कर दिया। नवजात का इलाज कसया के एक निजी अस्पताल में चल रहा है।