जंगलीपट्टी गांव के पास एपी बांध तक पहुंची बड़ी गंडक।
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गंडक की कटान से जंगलपट्टी गांव पर मडरा रहा खतरा
तमकुहीरोड (कुशीनगर)। एपी बांध के किनारे बसे जंगलीपट्टी गांव के पास गंडक नदी ने कटान तेज कर दी है। कटान स्थलों में अहिरौलीदान के बाद जंगलपट्टी सर्वाधिक संवेदनशील स्थान है, जहां केवल बैग में मिट्टी डालकर बचाव कार्य की खानापूर्ति की गई है। इससे लोगों की चिंता बढ़ गई है।
पिछले साल मानसून सत्र में गंडक नदी ने बाघाचौर और अहिरौलीदान में तबाही मचाई थी। इस साल सबसे अधिक खतरा जंगलीपट्टी गांव पर मड़राने लगा है। यहां नदी एपी बांध के समीप तक पहुंच गई है। जबकि बाढ़ खंड विभाग इस कटान को रोकने के लिए महज मिट्टी से भरे बैग का इस्तेमाल कर रहा है। लोगों का कहना है कि दो साल पहले तक गंडक नदी एपी बांध से दो से तीन किलोमीटर दूर थी, लेकिन गांववालों द्वारा बार-बार चेताए जाने के बाद भी विभाग ने कटान रोकने के लिए जरूरी इंतजाम नहीं किए। इसका परिणाम है कि नदी सैकड़ों हेक्टेयर उपजाऊ भूमि को निशाना बनाते हुए अब बांध के समीप पहुंच गई है। मथुरा सिंह का कहना है कि मिट्टी की उपयोगिता तब तक सार्थक है, जब तक गंडक नदी में पानी की मात्रा सामान्य है। जैसे ही बाल्मीकि नगर बैराज से एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ने का सिलसिला शुरू होगा, स्थिति भयावह हो जाएगी। ऐसे में बांध पर गंडक नदी का दबाव बढ़ा तो जंगलीपट्टी के साथ परसा, पिरोजहा, घघवा जगदीश, बिनटोली, बलुही, बैजुपट्टी सहित अन्य कई गांवों के वजूद पर खतरा बढ़ जाएगा। जंगलीपट्टी निवासी रणविजय सिंह, बाबूलाल निषाद, सुधीर यादव, मनोज गुप्ता, रामनारायन यादव, प्रदीप सिंह आदि ने बाढ़ खंड विभाग से बांध के किनारे बोल्डर से रिवेटमेंट कराने की मांग की है। बाढ़ खंड के सहायक अभियंता पीसी त्रिपाठी ने बताया कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है।