पडरौना। ईद मिलादुन्नबी होने के कारण सोमवार को मेडिकल कॉलेज की ओपीडी आधे दिन ही चली। सुबह सात बजे के बाद से ही ओपीडी में मरीज पंजीकरण कराने के लिए पहुंचने लगे। दिन के 11:30 बजे तक 815 मरीजों ने ओपीडी में उपचार कराया। इनमें सर्वाधिक संख्या वायरल फीवर के मरीजों की रही। डॉक्टरों का कहना है कि तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण सर्दी-खांसी और बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। ऐसे मरीजों को पांच दिन की दवा देकर खानपान में विशेष परहेज की सलाह दी जा रही है।
सोमवार की सुबह सात बजे के बाद से ही मेडिकल कॉलेज में लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ। अपने तय समय आठ बजे से एमसीएच विंग में पर्ची काउंटर खुला तो मरीज व तीमारदार पंजीकरण कराने में जुट गए। एक घंटे में ही 430 मरीज पंजीकरण करा चुके थे। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया तो मरीजों की भीड़ उमड़ने लगी। पर्ची काउंटर से निकलने के बाद लोग ओपीडी में डॉक्टरों के कक्ष के आगे लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करने लगे।
फिजीशियन डॉ. दीन मोहम्मद, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश कुमार, डॉ. अनवर, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अमरेंद्र सिंह, डॉ. वेद मणि त्रिपाठी, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. कंदर्प यादव अपने कक्ष में उपचार करते नजर आये। सर्वाधिक भीड़ फिजीशियन डॉ. दीन मोहम्मद के कक्ष के सामने लगी थी। यहां सर्दी-खांसी, बदन दर्द और तेज बुखार से पीड़ित मरीज उपचार कराने पहुंचे थे। दिन के 11:30 बजे तक 815 मरीजों का उपचार किया जा चुका था। ओपीडी से निकलने के बाद मरीज व तीमारदारों की भीड़ दवा काउंटर पर लग गई।
डॉ. दीन मोहम्मद का कहना था कि मौसम में बदलाव का असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। तापमान में गिरावट होने से लोग सर्दी-खांसी और बुखार की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे मरीजों को दवा देने के साथ ही उन्हें बचाव की भी जानकारी दी जा रही है। उन्होंने मच्छरों से बचने की सलाह देते हुए बताया कि कूलर व गमले के पानी को हर रोज बदलते रहें। मच्छरों से बचने के लिए पूरे शरीर को ढंककर रखें और मच्छरदानी का प्रयोग करें। इस मौसम में डेंगू का भी खतरा बना रहता है।
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सीएचसी-पीएचसी में जांच नहीं, मजबूरी में पहुंच रहे मेडिकल कॉलेज
ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं होने का दावा तो किया जाता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के सीएचसी-पीएचसी पर सुविधाओं का अभाव है। यही वजह है कि लोग सीएचसी-पीएचसी पर उपचार कराने के बजाय मेडिकल कॉलेज में ही डॉक्टरों से दिखाने और जांच कराने पहुंच रहे हैं। समउर की प्रियंका प्रजापति का कहना था कि पीएचसी पर अगर अल्ट्रासाउंड व एक्सरे की सुविधा होती तो 40 किमी की दूरी तय कर उन्हें मेडिकल कॉलेज नहीं आना पड़ता। इसी तरह दुदही की सकीला, रामपुर बरहन के बद्री प्रसाद, कोटवा के रामउग्रह साहनी का कहना था कि सीएचसी में जरूरी जांच नहीं होती है। इसलिए वह मेडिकल कॉलेज में ही उपचार कराने आते हैं। यहां ब्लड जांच से लेकर हर तरह की जांच की सुविधा है। यहां तक आने में परेशानी होती हैं, लेकिन निशुल्क जांच व उपचार की सुविधा मिल जाती है।