संवाद न्यूज एजेंसी
कुशीनगर। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थली कुशीनगर के विकास के लिए अब तक करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इसके बावजूद यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करने का कोई केंद्र नहीं बनाया जा सका है। इसका नतीजा है कि यहां पहुंचने वाले सैलानियों का दल कुछ घंटों में ही पुरातत्व विभाग के संरक्षित स्मारकों का भ्रमण कर दूसरे बौद्ध स्थल के लिए रवाना हो जाते हैं। पर्यटन विभाग की कुछ परियोजनाएं पूरी हैं, लेकिन किन्हीं कारणों से उन्हें हस्तांतरित होने का इंतजार है। वहीं, कई परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं। अगर यह परियोजनाएं धरातल पर उतरीं तो आकर्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा भी मिलेगा। साथ ही आसपास के लोगों रोजगार के अवसर भी मिल सकेंगे। कुशीनगर बौद्ध अनुयायियों के लिए प्रमुख बौद्ध तीर्थस्थल है, लेकिन वर्तमान में यहां मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में छठवीं शताब्दी की लेटी महात्मा बुद्ध की प्रतिमा मुख्य आकर्षण का केंद्र है। इसके अलावा माथा कुंवर, रामाभार स्तूप और कुछ बौद्ध देशों की तरफ से मंदिर और बौद्ध विहार कुछ हद तक विदेशी मेहमानों के लिए आकर्षण के केंद्र हैं। पर्यटन विभाग, कुशीनगर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण, नगरपालिका व जिला प्रशासन भी करोड़ों रुपये खर्च कर चुके हैं, लेकिन कुछ एक विकास कार्यों के अलावा कोई ठोस केंद्र नहीं है, जहां पर्यटकों का दल कुछ समय बिता सके।
हस्तांतरित न होने से धूल फांक रही परियोजनाएं : कुशीनगर में पर्यटन को बढ़ाने के लिए 4 अगस्त 2021 को विश्व बैंक सहायतित 18.74 करोड़ रुपये की लागत से पथिक निवास का उच्चीकरण, बुद्ध विपश्यना उपवन का सुंदरीकरण, पाथ-वे, पवेलियन, दो तालाबों का सुंदरीकरण, भव्य ध्यान केंद्र, हिरण्यवती नदी पर परिक्रमा पथ का निर्माण कराया गया। वहीं फुट ओवरब्रिज, फूड प्लाजा का नवीनीकरण, हस्त शिल्पकारों के लिए आठ दुकानें व पाथ-वे के किनारे विक्टोरियन लैंप लगाने का काम किया गया है। पथिक निवास के उच्चीकरण के अलावा सभी परियोजनाएं धूल फांक रहीं हैं। हस्तांतरित और उसके संचालन नहीं होने लोगों के लिए अनुपयोगी बनी हुई हैं।
8.05 करोड़ से पर्यटक सुविधा केंद्र का निर्माण : पर्यटन विभाग पर्यटकों को लुभाने व सूचनाओं के लिए पांच एकड़ में एक भव्य पर्यटक सुविधा केंद्र का निर्माण करा रहा है। इसके निर्माण पर करीब आठ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। निर्माण कार्य अक्तूबर 2024 से शुरू है। पूरी करने की अवधि 30 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है।