दुदही क्षेत्र के बांसगांव के पास मगरमच्छ पकड़ते लोग।स्रोत-सोशल मीडिया
दुदही (कुशीनगर)। बांसी नदी से निकलकर मगरमच्छ विशुनपुरा ब्लॉक के बांसगांव के कोदई टोला में आबादी के बीच पहुंच गया। सुबह शौच के लिए निकले गांव वालों की नजर पड़ी तो लोग इधर-उधर भागने लगे। गांव के युवाओं ने हिम्मत जुटाई और रस्सी, डंडे की मदद से मगरमच्छ का रेस्क्यू किया। पिकअप में लादकर मगरमच्छ को नारायणी नदी में ले जाकर छोड़ दिया गया। इस दौरान करीब तीन घंटे तक गांव के लोग सहमे रहे। गांव वालों का आरोप है कि सूचना देने के बाद भी वन विभाग की टीम नहीं आई।
अभी तक मगरमच्छ बांसी नदी में जाने वाले लोगों पर हमला करते थे, अब नदी के आसपास बसे गांव में पहुंचने लगे हैं। बांसी नदी से करीब नौ सौ मीटर की दूरी पर बसे बांसगांव के कोदई टोला में बुधवार को पहुंच गया। गांव के लोग शौच करने के लिए जा रहे थे तो गांव में बसवाड़ी के पास सुबह छह बजे मगरमच्छ को देख शोर मचाए। गांव में मगरमच्छ आने की खबर मिलते ही लोग सहम गए। गांव के लोगों ने वन विभाग के रेंजर को सूचना दी।
करीब एक घंटे इंतजार करने के बाद वन विभाग की टीम नहीं पहुंची तो गांव के नागेंद्र यादव, हंटू राय, नरेश यादव, लक्ष्मी यादव समेत बीस युवाओं ने हिम्मत जुटाई और मगरमच्छ का रेस्क्यू किया। गांव के लोग रस्सी, डंडे की मदद से मगरमच्छ को काबू में करने का प्रयास किया तो मगरमच्छ खेतों के रास्ते बांसी नदी की ओर भागने लगा। युवाओं ने मगरमच्छ को नदी के समीप घेर लिया और डंडे की मदद से काबू में किया। रस्सी में मगरमच्छ को बांधने के बाद घसीटते हुए उसे पिकअप में रखा और नारायणी नदी में ले जाकर छोड़ दिए। मगरमच्छ आने और काबू में कर छोड़ने की प्रक्रिया में सुबह सात बजे से 10 बजे तक यानी तीन घंटे लगा लेकिन कोई वनकर्मी नहीं पहुंचा। इसके पहले बांसी नदी में या नदी के किनारे जाकर मछली का शिकार करने वाले मछुआरों पर धोकरहा घाट पर मगरमच्छ हमला कर चुके हैं। गांव वालों ने बताया कि मगरमच्छ की लंबाई करीब आठ फीट थी,रेस्क्यू के दौरान वह कई बार हमला लोगों पर करने का प्रयास किया लेकिन पानी से बाहर होने के कारण मगरमच्छ कमजोर पड़ जा रहा था।
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-वनकर्मी गांव में गए थे लेकिन गांव वालों ने मगरमच्छ को ले जाकर नारायणी नदी में छोड़ दिया था। सूचना देर से मिली थी इसलिए पहुंचने में देरी हुई। गांव वालों को सतर्क रहने के लिए जागरूक किया गया है। नदी में पानी बढ़ा है। मगरमच्छ अपने शिकार में दो किमी तक नदी से बाहर जा सकता है। यह उनके स्वभाव में है। -रणविजय सिंह, रेंजर तमकुहीराज