गोरखपुर/खड्डा। कमिश्नर दफ्तर पर उत्पात मचाने वाली दोनों महिलाओं के पिता अब भी अपने निर्णय पर कायम हैं। कुशीनगर प्रशासन की तरफ से बृहस्पतिवार को समझाने गए नायब तहसीलदार को उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि संपत्ति उन्होंने अर्जित की है और वे कत्तई इसे उन दोनों महिलाओं को नहीं देंगे जो पूर्व प्रधान की शह पर उनका नाम खराब कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि बुरे समय में बड़ी बेटी और उसके पति ने उनकी सेवा की, लिहाजा पूरी संपत्ति पर उन्हीं का अधिकार है। बता दें कि खड्डा तहसील के बुलहवा गांव के पथलहवां टोला निवासी विक्रम शर्मा का घर पहले शालिकपुर गांव में था। बाढ़ से कटान के बाद विस्थापित होकर विक्रम पथलहवां में आकर बस गए। उनकी तीन बेटियां हैं।
विक्रम की पत्नी का काफी पहले निधन हो चुका है। उन्होंने तीनों बेटियों की शादी कर दी है। देखभाल के लिए बड़ी बेटी उन्हीं के पास रहती है, जबकि दोनों छोटी बेटियां माला और मूरत अपनी ससुराल में। विक्रम के कहने पर बड़ी बेटी ने पिता की जमीन पर मकान बनवाना शुरू किया था कि माला और मूरत ने वहां पहुंचकर अपनी भी दावेदारी कर दी।
पिता ने इनकार कर दिया तो मामला प्रशासन के पास पहुंचा, मगर प्रशासनिक अफसरों के सामने भी विक्रम ने दोनों को संपत्ति में हिस्सा देने से इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों बहनें बुधवार को कमिश्नर दफ्तर पहुंचीं और वहां भी हिस्से की मांग की जिसे कमिश्नर ने कोर्ट का मामला बताते हुए वहां जाने की सलाह दी।
इसके बाद बाहर निकलकर दोनों ने बुलहवा की पूर्व प्रधान साबिरा बेगम के साथ उत्पात मचाना शुरू कर दिया। कमिश्नर की गाड़ी और उनके दफ्तर के बाहर मैला फेंक दिया। सूत्रों के मुताबिक चूंकि पहले ही कमिश्नर ने इस मामले में कुशीनगर प्रशासन को कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। ऐसे में मामला गरमाने पर बृहस्पतिवार को कुशीनगर प्रशासन ने एहतियातन खड्डा तहसील में तैनात नायब तहसीलदार रामनाथ को पथलहवा भेजा।
उन्होंने विक्रम से माला और मूरत को भी हिस्सा देने के संबंध में बात की मगर उन्होंने सीधे तौर पर इनकार कर दिया। नायब तहसीलदार का कहना है कि पथलहवा गांव जाकर वस्तुस्थिति की जानकारी ली गई। विवाद के सिलसिले में कानूनगो और लेखपाल ने भी पूर्व में रिपोर्ट दी थी। विक्रम दोनों छोटी बेटियों को जमीन में हिस्सा देने के लिए राजी नहीं हैं।