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पडरौना में ‘ठगी का बैंक’ चला चुका है काशीनाथ

Sat, 21 Nov 2015 11:55 PM IST
अमर उजाला/कुशीनगर
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कुशीनगर। निजी संस्था को भारत सरकार का उपक्रम बताकर नौकरी का झंासा देकर बेरोजगारों के पांच करोड़ से ज्यादा हड़पने वाले कुशीनगर के काशीनाथ तिवारी ने ठगी की शुरुआत पडरौना में बैंक शाखा खोलकर की थी। लोगों को गुमराह करने के लिए बैंक का नामकरण भी इस तरह किया था कि उस पर कोआपरेटिव बैंक की छाप महसूस हो।
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बैंक तथा कुछ और संस्थाओं के दफ्तरों में नौकरी के नाम पर ठगी का खेल खुलने लगा तो कुछ समय के लिए भूमिगत हो गया और बाद में लखनऊ पहुंचकर अपने धंधे का जाल फैलाने में जुट गया था।
मूल रूप से अहिरौली बाजार के कुसुमा गांव के रहने वाले काशीनाथ तिवारी का परिवार कई साल पहले सुकरौली बाजार में बस गया था। काशीनाथ ने वर्ष 2003 में पडरौना की आवास विकास कॉलोनी में नगर सहकारी बैंक नाम से एक शाखा खोली थी।
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नगर सहकारी बैंक में सहायक मैनेजर सहित कई पदों पर भर्ती का लालच देकर इलाके के कई नौजवानों को ठगा था। कुछ समय बाद तमकुही में भी इस बैंक की शाखा खोल ली। भर्ती के झांसे में आकर रकम देने वालों को जब तय वक्त पर रोजगार नहीं मिला तो कुछ लोग पुलिस तक पहुंचे।
तमकुही की बैंक शाखा में सहायक प्रबंधक के पद पर नियुक्त किए गए चखनी खास गांव के रहने वाले गोविंद ने शक होने पर बिना लाइसेंस के बैंक चलाने की शिकायत पडरौना पुलिस से की थी। कुछ अधिकारियों को भी चिट्ठी भेजी थी। लखनऊ से एक जांच टीम पहुंची।
उसके बाद गोविंद की तहरीर पर पडरौना कोतवाली में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ था। काशीनाथ पर नौकरी दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी का एक केस पटहेरवा में भी दर्ज हुआ था। पुलिस ने बैंक शाखा को सील करने के साथ काशीनाथ को हिरासत में लिया था।
गोविंद का आरोप है कि पूछताछ की रस्म अदायगी के बाद पुलिस ने न सिर्फ काशीनाथ को छोड़ दिया, बल्कि आगे की कार्रवाई से भी हाथ खींच लिए। धन के इस्तेमाल और प्रभावी लोगों तक पहुंच का हवाला देकर काशीनाथ ने लखनऊ की टीम की जांच और पुलिस कार्रवाई को रफा-दफा कराने में कामयाबी हासिल कर ली।
कुछ समय खामोश रहने के बाद काशीनाथ ने 2007 में पडरौना के ही भूतनाथ कॉलोनी में नगर सहकारी बैंक के नाम से एक और शाखा खोली, लेकिन पहले से ठगी के शिकार लोगों के वहां तक पहुंचने और हंगामा करने पर 15 दिन में इस बैंक शाखा को बंद करके वह भूमिगत हो गया।
कुछ साल खामोश रह कर उसने शराब फैक्ट्री खोलने की सूचना का बोर्ड हाइवे पर लगाया और उसमें नौकरी देने के नाम पर फिर कई लोगों को ठगी का शिकार बनाया। ऐसा ही फाजिलनगर में पूर्वांचल कृषि विपणन निगम लिमिटेड में भर्ती के नाम पर किया।
इससे जुटी रकम के बाद वह इलाका छोड़कर भाग गया। क्षेत्र के लोग बताते हैं कि कुछ समय बाद उसके लखनऊ में प्रभावी पद पर स्थापित हो जाने की जानकारी यहां तक पहुंची। अब लखनऊ पुलिस की क्राइम ब्रांच के हाथों उसकी गिरफ्तारी की जानकारी मिलने पर पूर्व में ठगी के शिकार लोग फिर से अपना मामला अफसरों तक पहुंचाने की कोशिश में लग गए हैं।

सत्ता के करीब रहता था
सरकारी नौकरी के झांसे में मेहनत की कमाई काशीनाथ के हवाले कर चुके लोग उनके करीबी बताते हैं कि प्रदेश सरकार से नजदीकी रिश्तों का हवाला देकर काशीनाथ खुद को बचाने में कामयाब हो जाता था। कुछ साल पहले उसने खुद को राज्यमंत्री का दर्जा मिलने का प्रचार करते हुए लालबत्ती कार का इस्तेमाल भी किया था।
सूबे में सरकार बदलने के साथ वह अपना चोला बदलकर अपना नाता सत्ताधारी दल के किसी प्रभावी नेता से जोड़ लेता था। बसपा शासन में ऐसे प्रचार से उसने इलाके में खूब धाक जमाई, जबकि मौजूदा सरकार के एक दमदार नेता से उसकी नजदीकी भी चर्चा में रही है।

फाइनेंस कंपनी से सीखे जालसाजी के गुर
चार भाइयों में सबसे छोटे काशीनाथ तिवारी के करीबी बताते हैं कि पढ़ाई के दौरान से उसके काम में शातिराना सोच झलकती थी। इंटर की पढ़ाई पूरी करके वर्ष 2000 में काशीनाथ ने ‘लीजर्ड फाइनेंस’ नामक कंपनी में मैनेजर के पद पर काम किया।
यहीं से जालसाजी और ठगी से कमाई का सपना लेकर कुछ महीने बाद ग्रामीणांचल फाइनेंस खुद की कंपनी शुरू की। बाद में खुद का बैंक खोलने तक के कदम बढ़ाए और हर जगह नौकरी देने के नाम पर लोगों को जालसाजी का शिकार बनाया। चखनी खास, गौरी श्रीराम और बतरौली धुरखड़वा सहित कई गांवों के लागे इस ठगी का शिकार हुए।

भतीजों ने विदेश भेजने के नाम पर ठगी की थी
गोरखपुर। काशीनाथ के भतीजे भी लोगों को ठगी का शिकार बनाने के मामले में सुर्खियों में रह चुके हैं। विदेश भेजने के नाम पर कई लोगों से ठगी करने के आरोप में पीपीगंज में 2009 तीन लोग पकड़े गए थे। इनमें से दो काशीनाथ के भतीजे थे। इनके खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट के अलावा धोखाधड़ी, जालसाजी का केस दर्ज हुआ था। पुलिस ने इन लोगों को पासपोर्ट माफिया डी-1 गैंग के रूप में चिह्नित किया था। हालांकि आगे की कार्रवाई से पहले पुलिस के कदम थम गए।
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