बांदा। चर्चित शानू हत्याकांड में ढाई साल बाद अदालत ने इस मामले में चार अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। उन पर 10-10 हजार रुपये जुर्माना भी हुआ है।
हत्याकांड में सात के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज हुई थी। तीन को पुलिस ने तफ्तीश में क्लीन चिट दे दी थी। इनमें से एक की बाद मेें हत्या हो गई।
मर्दन नाका निवासी 27 वर्षीय इमरान उर्फ शानू 30 मार्च 2013 को रात करीब आठ बजे गूलर नाका स्थित मंसूरी इमामबाड़ा के पास इनवर्टर की दुकान में बैठा था।
इसी दौरान कार से आए कई लोगों ने उसे दुकान से बाहर खींच लिया और तमंचे से तीन गोलियां मारकर हत्या कर दी। शानू के भाई इरफान खां ने सात लोगों के विरुद्ध नामजद रिपोर्ट कराई थी।
पुलिस ने 302, 307, 420, 467, 468, 471 व 120बी और 3/25 आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था। नामजद लोगों में मुन्ना पुत्र मंसूर, इकबाल पुत्र लाल खां, मुन्नू पुत्र मंसूर, रिजवान पुत्र शकूर, अलीम पुत्र सलीम, जुगनू पुत्र झल्लू और बिलाल पुत्र अज्ञात शामिल थे।
सभी शहर के मर्दननाका के निवासी हैं। पुलिस ने तफ्तीश में मुन्नू, रिजवान और बिलाल को क्लीन चिट देते हुए मुकदमे से बाहर कर दिया। तफ्तीश के बाद पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।
अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता मूलचंद्र कुशवाहा और फौजदारी के वरिष्ठ वकील रामस्वरूप सिंह ने चार गवाह पेश किए।
शनिवार को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश केके अस्थाना ने फैसला सुनाते हुए आरोपी मुन्ना उर्फ अबरार, इकबाल, अलीम और जुगनू को धारा 302/34 में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
अन्य धाराओं में भी सजा और जुर्माना किया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। आरोपी अलीम और मुन्ना घटना के बाद से ही जेल में हैं।
आरोपी इकबाल और जुगनू जमानत पर बाहर हैं। तफ्तीश में क्लीन चिट पाए आरोपी इंतजार उर्फ मुन्नू की नौ अक्तूबर 2013 की रात डीएवी कालेज के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह केस भी अदालत में चल रहा है।