पडरौना। जिले के अपर सत्र न्यायाधीश लालमणि ने पॉक्सो एक्ट के मामले में पहली सजा सुनाई है। तीन साल पुराने इस मामले में हाटा कोतवाली क्षेत्र के आरोपी छत्रधारी को 10 साल के सश्रम कारावास और 10 हजार के अर्थदंड से दंडित किया गया है। इस आरोपी को रेप के मामले में भी 10 वर्ष की सजा और 10 हजार के अर्थदंड से दंडित किया गया है। अर्थदंड की कुल धनराशि में से आधी धनराशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में मिलेगी।
हाटा कोतवाली क्षेत्र में तीन साल पहले छत्रधारी पुत्र सीताराम के विरुद्ध सात वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम) के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। मामले की सुनवाई अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कसया की अदालत में हो रही थी। बीते जनवरी महीने में सत्र न्यायाधीश के आदेश पर इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर दो लालमणि की अदालत में शुरू हुई। अपर सत्र न्यायाधीश लालमणि ने अभियोजन पक्ष की तरफ से पीड़िता, उसकी मां, बहन और मेडिकल परीक्षण करने वाली डॉक्टर समेत छह लोगों का पक्ष सुना। न्यायिक अभिरक्षा में अभियुक्त छत्रधारी को अपर सत्र न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया गया। उसकी तरफ से न्याय मित्र ने कम से कम सजा दिए जाने की बात कही। वहीं, अभियोजन पक्ष की तरफ से डीजीसी क्रिमिनल गोरख यादव ने अपराध की गंभीरता का तर्क प्रस्तुत करते हुए अधिकतम दंड की मांग की।
सभी पक्षों को सुनने के बाद मंगलवार को न्यायाधीश लालमणि ने आरोपी अभियुक्त छत्रधारी को पॉक्सो एक्ट के मामले में पहली सजा सुनाते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। रेप के मामले में भी 10 वर्ष की कठोर सजा और 10 हजार के अर्थदंड की सजा दी है। अर्थदंड की समस्त धनराशि में से आधी धनराशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में मिलेगी।