पडरौना। नौ अप्रैल को आग की लपटों में अपनी गृहस्थी के सभी सामान खो चुके रामधाम विशुनपुरा गांव के मुसहरों सहित 28 परिवारों के दु:खों का अंत नहीं हो रहा है। प्लास्टिक की पन्नी तानकर बच्चे, महिलाएं और उनके घर के अन्य लोग आज भी तपती धूप में गुजर-बसर करने को विवश हैं। लेकिन इन मुसहर परिवारों के सहारे राजनीति चमकाने वाले इनके गुरबत में इनके साथ नहीं हैं।
रामधाम विशुनपुरा गांव में पिछले शनिवार को आग लगने से 28 घर जल गए थे। इनमें किसी के घर तो किसी की आजीविका का सहारा रहीं दुकानें और ठेले तक जल गए थे। तबाही इस कदर हुई थी कि इनके पास तन ढकने के लिए कपड़े और दो वक्त की निवाले के लिए अनाज तक नहीं बचा। ऐसे कई परिवार हैं, जिनके घरों में शादी की तैयारी थी, लेकिन आग की लपटों ने सब कुछ लील लिया।
प्रशासन की तरफ से इतनी ही इमदाद मिल सकी कि प्रत्येक अग्निपीड़ितों को 7900 रुपये का चेक दे दिया। लेकिन आग की लपटों में अपना सब कुछ खो चुके इस गांव के अग्निपीड़ितों के लिए यह धनराशि ऊंट के मुुंह में जीरा के समान है। गांव के ही फिरोज कहते हैं कि आग ने उनका सब कुछ छीन लिया। न रहने के लिए घर बचा न ही कपडे़। सदर विधायक एवं नेता प्रतिपक्ष विधानसभा स्वामी प्रसाद मौर्य की बात छोड़ दी जाए तो और कोई नेता देखने तक नहीं आया।
अमजेरी कहती हैं कि चिलचिलाती धूप में प्लास्टिक के नीचे रहना मजबूरी है। ऐसा लगता है कि पूरा शरीर झुलस जाएगा। खाने के लिए अनाज भी नहीं है। रजिया का कहना था कि पिछले शनिवार को आग में सब कुछ जल गया था। तब से अक्सर ही फांकाकशी में दिन गुजरा रहा है। इसी गांव की चैनपती का कहना है कि उनके बेटे अशोक का विवाह 19 और बेटी मीना की शादी 22 अप्रैल को होनी है। शादी के लिए ज्यादातर सामान खरीद लिया गया था। लेकिन पिछले शनिवार को लगी आग में सामान जल गए।