फाजिलनगर (कुशीनगर)। बैंकों में मनमानी तरीके से ऋण बांटने का खेल केवल बड़े शहरों में ही नहीं बल्कि निचले स्तर पर भी खूब चल रहा है। फाजिलनगर क्षेत्र में भी एक ऐसा प्रकरण सामने आया है जिसमें गारंटर बने व्यक्ति को कुछ पता भी नहीं है और उसकी गारंटी पर एक पेट्रोल पंप मालिक ने 38 लाख रुपये से अधिक का ऋण ले लिया है। मामला बीते वर्ष के जुलाई महीने का है। गारंटर बनाए गए इस व्यक्ति ने कुछ दिन पहले बैंक से लोन के लिए स्टेटस चेक कराया तब इस मामले की जानकारी हुई। पटहेरवा थाना क्षेत्र के गांव लक्षिया देवरिया निवासी असगर अली फाजिलनगर के बाबू बाजार में दवा की दुकान चलाते हैं। पिछले सप्ताह उन्हें अपने कारोबार के लिए कुछ ऋण की जरूरत पड़ी तो यहां के सेंट्रल बैंक की शाखा में पहुंचे। ऋण प्राप्त करने के लिए दवा विक्रेता ने बैंक कर्मियों से बात की तो उन लोगों ने पैन कार्ड व आधारकार्ड के जरिए अन्य बैंकों से उनके द्वारा पूर्व में लिए गए ऋण की स्थिति चेक की। इस दौरान पता लगा कि वे तो सेंट्रल बैंक की इसी शाखा में एक खातेदार के 38 लाख रुपये से अधिक के ऋण के गारंटर हैं। इसकी जानकारी से दवा विक्रेता सन्न रह गए। डिटेल खंगाला गया तो पता लगा कि बीते 30 जुलाई केे इस शाखा से क्षेत्र के एक पेट्रोल पंप संचालक ने ऋण लिया है जिसमें असगर अली ही गारंटर हैं।
सेंट्रल बैंक के वरिष्ठ अफसरों को दिए गए शिकायती पत्र में असगर ने बताया है कि उनका सेंट्रल बैंक की फाजिलनगर शाखा में कोई खाता ही अब तक नहीं खुला है तो वे गारंटर कैसे हो सकते हैं। इनका कहना है कि वे किसी अन्य बैंक शाखा में भी किसी के गारंटर नहीं हैं और न ही इसके लिए उन्होंने अपना अभिलेख ही किसी को दिया है। असगर ने पटहेरवा एसओ को भी इससे संबंधित एक पत्र देकर मामले की जांच करने व आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने की मांग की है।
इस संबंध में सेंट्रल बैंक के फाजिलनगर शाखा प्रबंधक एसडी कुशवाहा का कहना है कि मामले की जानकारी है। वरिष्ठ अधिकारियों को भी इससे अवगत करा दिया गया है। जल्दी ही जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।