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जीवित्पुत्रिका व्रत के दिन थम गईं दो बेटों की सांसे

Tue, 02 Oct 2018 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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नाव से सैर करने गए युवक डूबे - फोटो : अमर उजाला
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पडरौना। बेटों की सलामती के लिए जीवित्पुत्रिका व्रत रखीं इस हृदय विदारक घटना से सदमे में हैं तो दो परिवारों के होनहार बेटों की मौत से गांव के लोग गमगीन। पीड़ित परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। पीड़ित परिजनों की दशा देख कर किसी की आंखें भर आईं।

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मृतक जनार्दन के पिता सुरेंद्र मजदूरी करते हैं। घर का खर्च चलाने के लिए सुरेंद्र कश्मीर गए हैं, जहां वह कच्ची ईंट के निर्माण का कार्य करते हैं। दो भाई तथा दो बहनों मेंर जनार्दन सबसे बड़ा था। घर की रोजी रोटी चलाने में पिता का हाथ बंटाने के लिए कुछ महीने पूर्व जनार्दन भी पूना कमाने गया था। दो दिन पूर्व ही वह पूना से कमाकर घर लौटा था।

 

मां मीरा देवी पति और बड़े बेटे की गैरमौजूदगी में घर तथा परिवार की देखभाल करती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है। जिसके चलते परिवार के लोग छप्पर डालकर किसी तरह अपना गुजरबसर करते हैं। बेटे की मौत से मां बेसुध थी। पिता को घटना की सूचना दे दी गई है। जबकि मृतक विकास दो भाइयों में बड़ा था।
 

विकास कक्षा नौवी में पढ़ता था। गांव के लोग बताते हैं कि वह पढ़ने-लिखने में होनहार था। घर का बड़ा बेटा होने के नाते माता पिता तथा छोटे भाई विपिन को विकास से बहुत उम्मीदें जुड़ी हुई थीं। विकास का सपना था कि वह पढ़ लिखकर कुछ ऐसा मुकाम हासिल करें, जिससे परिवार और गांव का नाम रोशन हो सके, लेकिन उसका यह सपना अधूरा रह गया। विकास के पिता बिग्गन एक प्राइवेट कंपनी में कार्य करते हैं। विकास की मां सुनीता का रो- रो कर बुरा हाल था। जीवित्पुत्रिका का ब्रत रखने वाली माताओं को अफसोस था कि उनके बेटे की जिंदगी नहीं बच सकी।

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