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सड़क की जमीन में बनवाया गया घर प्रशासन ने तोड़वाया

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हाईकोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने हटवाया कब्जा
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विरोध के बावजूद प्रशासन ने जेसीबी से तोड़ा पक्का मकान
अमर उजाला ब्यूरो
तमकुहीरोड। तरयासुजान क्षेत्र के गोसाईपट्टी में हाईकोर्ट के निर्देश पर तहसील प्रशासन ने सड़क पर बने पक्के मकान को जेसीबी से तोड़वा दिया। प्रशासन की ओर से जारी नोटिस के बावजूद भवन स्वामी निर्माण और अतिक्रमण नहीं हटाया। प्रशासन ने फोर्स के साथ गांव में पहुंच कर उस अवैध निर्माण को तोड़वा दिया।
तरयासुजान क्षेत्र के गोसाईपट्टी गांव में बाबूलाल पुत्र यमुना ने गांव की सड़क पर पक्का मकान का निर्माण करा लिया था। इससे गांव के ही नरेश पुत्र जग्गू का खेत में जाने का रास्ता अवरुद्ध हो गया था। इससे गांव वाले भी परेशान थे और उन्हें अपने खेत व घरों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। नरेश की ओर से अवैध निर्माण को ढहाने और सड़क से अतिक्रमण को हटाये जाने को लेकर तहसील से लगायत जिले के उच्च अधिकारियों से गुहार लगाई गई थी। प्रशासन की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने अवैध कब्जा हटवाने का आदेश दिया था। उसी के क्रम में रविवार को राजस्व निरीक्षक रामकवल सिंह, हल्का लेखपाल धर्मेंद्र प्रजापति, जयंत गुप्ता, अश्वनी राय व अन्य राजस्व कर्मी, महिला पुलिस समेत मौके पर पहुंच गए। कुछ लोगो के विरोध के बावजूद पुलिस और राजस्वकर्मियों के सहयोग से अवैध मकान से पहले सारा सामान हटवा दिया और बाद में जेसीबी से पक्का मकान के साथ अनाज रखने वाले दो बखार को भी तोड़वा कर रास्ता साफ करा दिया।
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ग्रामसभा के गड्ढ़े की जमीन में निर्माण को ग्रामीणों ने रोका
टेकुआटार। कसया तहसील क्षेत्र के गांव अहिरौली राजा में रविवार के दिन ग्राम सभा की गड्ढे की जमीन में हो रहे निर्माण कार्य को गांववालों ने रोक दिया। इस जमीन में मिट्टी डालकर पाटने के बाद निर्माण कराया जा रहा था। विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि निर्माण होने से आधे गांव की जलनिकासी व्यवस्था ठप हो जाती।
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ग्राम सभा में गड्ढे की जमीन है, जिसमें पूरे ग्राम सभा के लोगों का पानी जाकर गिरता है। उसी गड्ढ़े की जमीन में एक व्यक्ति मिट्टी डालकर पक्का निर्माण करा रहा था। सूचना पर ग्राम प्रधान अजय जायसवाल, अनंत गोंड, छट्ठू गुप्ता, दिनेश अग्रवाल, शंभू, सुरेश, प्रदीप, रमेश, सुरेश, मोहन, रामप्रवेश, कपूरचंद, आशीष, ओमप्रकाश, सोहन, गोलू, रामवृक्ष गुप्ता आदि ने पहुंचकर निर्माण कार्य को रोक दिया। ग्रामीणों का यह कहना था कि उस गड्ढ़े में गांव के आधे लोगों की नाली का पानी जमा होता है। इसको लेकर लगभग चार साल पहले भी ग्रामीणों ने पंद्रह दिनों तक धरना प्रदर्शन से लेकर भूख हड़ताल तक किया था। उसके बाद कसया के तत्कालीन तहसीलदार ने मौके पर आकर तत्काल अवैध कब्जे को हटवाने का आश्वासन देकर भूख हड़ताल समाप्त कराया था। हालांकि उसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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