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बुुआ की बात मानते बच जाती दोनों भाइयों की जान

बरहज के मगहरा में दोनों सगे भाइयों का शव पहुंचने पर बिलखते परिजन - फोटो : अमर उजाला
बरहज। सरयू नदी में डूबने से जान गंवाने वाले दोनों भाइयों को मौत ही ननिहाल खींचकर ले गई थी। बच्चों ने बुआ की बात मानी होती और बड़े भाई के साथ छुट्टियां मनाने भोपाल गए होते तो शायद यह अनहोनी नहीं होती। हादसे के बाद परिजन यह कहते हुए नियति को कोस रहे हैं। सोमवार को बच्चों का शव गांव पहुंचा। दोपहर बाद उनका अंतिम संस्कार हुआ। खुखुंदू थानाक्षेत्र के मगहरा गांव निवासी राजेश के तीन पुत्र अमित, पीयूष और अनुज हैं। पीयूष कक्षा 11 और अनुज 10वीं का छात्र था। बीते 19 मई को उनके चाचा मोहन की शादी थी। मांगलिक कार्यक्रम में घर पर रिश्तेदार जुटे थे। शादी समारोह बीतने के बाद बुआ ज्ञानती ने राजेश के तीनों बच्चों को अपने साथ छुट्टियों में भोपाल चलने का न्योता दिया था। पीयूष और अनुज अपनी मां के साथ ननिहाल चले गए, जबकि बड़ा भाई अमित घटना से एक दिन पहले ही बुआ के घर भोपाल चला गया था। उन्हें क्या पता था कि ननिहाल के बहाने दोनों की मौत खींच लाई है। बेटों की मौत पर मां सविता अपनी फूटी किस्मत पर रोना रो रही है, जबकि नाना बृजराज और नानी सुभावती घर आए दोनों बच्चों के मौत पर दहाड़ें मार रही थीं। उधर, नदी में डूबने वाला तीसरा किशोर शिवम कक्षा नौ का छात्र था। दो भाइयों में वह सबसे बड़ा था। उसका शव गांव पहुंचने पर मां पूनम देवी पछाड़ खाकर गिर पड़ीं।



नहाने वालों को रोकने के लिए लगाई गई पुलिस
आठ दिनों में सरयू में डूबने से पांच मौतों के बाद प्रशासन की तंद्रा भंग हुई है। घाट किनारे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने के बाद प्रशासन ने सोमवार से पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगा दी। वह नदी में नहाने वालों को रोकेंगे। ‘अमर उजाला’ ने सोमवार के अंक में इस लापरवाही को दर्शाती खबर प्रकाशित की थी। थानाध्यक्ष वीरबहादुर सिंह ने बताया कि नदी तट पर आस्थावानों की भीड़ और गर्मी से निजात पाने के लिए नहाने वालों की तादाद को देखते हुए दो पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। एसडीएम विनीत सिंह ने बताया कि नदी घाट पर पुख्ता इंतजाम कराया जाएगा।
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