बांध में दरार और बचाव कार्य का हिस्सा धंसा
लोग चिंतित, क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कराने में जुटे अभियंता
अमर उजाला ब्यूरो
तमकुहीरोड( कुशीनगर)। बड़ी गंडक पर बने नरवाजोत-पिपराघाट बांध में लगभग 25 मीटर लंबाई में मोटी दरार पड़ जाने और बचाव कार्य का एक बड़ा हिस्सा धंस जाने से बृहस्पतिवार को अफरा तफरी मच गई। इसके बाद अभियंताओं की देखरेख में मजदूरों ने दरार में मिट्टी की बोरियां डालकर उसे पूरी तरह ढक दिया और क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कराने में जुट गए हैं।
नरवाजोत-पिपराघाट बांध की लंबाई लगभग 3.200 किलोमीटर है। दहारी टोला से भंगी टोला के बीच लगभग आठ सौ मीटर हिस्सा पिछले 29 जुलाई से गंडक नदी के कटान की चपेट में है। एक माह से लगातार बोल्डर और मिट्टी से भरी बोरियों से बचाव कार्य कराया जा रहा है। रात में कटान व बांध की निगरानी और बचाव कार्य को लेकर विभाग की ओर से बांध पर प्रकाश की व्यवस्था कराई गई है। इसके बावजूद गंडक की कटान थमने का नाम नहीं ले रही है और इसे लेकर लोगों में बेचैनी बनी हुई है। अभी क्षतिग्रस्त हिस्से का बचाव कार्य चल ही रहा था कि बृहस्पतिवार को सुबह बांध के लगभग 25 मीटर हिस्से में करीब डेढ़ फीट मोटी दरार पड़ गई और उसी के सामने का बचाव कार्य का एक बड़ा हिस्सा भी नदी में धंस गया। इससे कुछ देर के लिए वहां अफरा तफरी मच गई।
बचाव कार्य और चौकसी बढ़ाई गई : एसडीओ
बांध की स्थिति जानने एसडीओ आमोद कुमार सिंह, जेई राकेश कुमार, संजय मौर्य, रमेशधर दूबे, श्रीराम यादव, राजेश सिंह, सुनील यादव सहित ग्राम प्रधान विद्यासागर सिंह, दूधनाथ शर्मा, पुजारी सिंह, जनार्दन चौहान, सकलदेव सिंह, ब्रह्मा साह, राजेंद्र सिंह, ध्रुव निषाद, सुरेंद्र सिंह, कैलाश सिंह सहित कई लोग पहुंचे। अभियंताओं ने पहले बांध में पड़ी दरार में मिट्टी से भरी बोरियों को डलवाकर भरवाया और धंसे हुए हिस्से को बचाने के कार्य में जुट गए। जबकि नरवाजोत बांध से सटे दहारी टोला, तवकल टोला, भंगी टोला, तेजू टोला और नरवाजोत गांव के लोगों ने बांध में मोटी दरार को खतरे का संकेत बताया है। एसडीओ आमोद कुमार सिंह का कहना है कि बचाव कार्य की गति बढ़ा दी गई है और पूरे बांध पर चौकसी बरती जा रही है।