कोरोना ने मां-बाप का साया छीना, अब सरकार भी दिखा रही बेरुखी
पडरौना। कोरोना ने पहले सिर से मां-बाप का साया छीन लिया, कुछ दिन लोगों ने मदद की, फिर सरकार ने भी भरोसा दिया। सरकार कुछ महीनों तक भरोसे पर खरी भी उतरी, पर अब मंझधार में छोड़ दिया।
बात हो रही है कोरोना काल में जिले में अपने माता-पिता को खोने वाले उन 213 बच्चों की, जिन्हें मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना कोविड के तहत दी जाने वाली रकम बीते छह माह से नहीं मिली है। ऐसे में ये बच्चे दाने-दाने को मोहताज हैं।
कोरोना के संक्रमण अथवा इससे मिलते-जुलते लक्षण वाली बीमारी से ग्रस्त होने से जान गंवाने वाले लोगों के बच्चों को छह माह से मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना कोविड और सीएम बाल सेवा योजना सामान्य का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस योजना के तहत कोविड से मरने वाले लोगों के सभी बच्चों को चार हजार रुपये प्रतिमाह और इससे मिलते-जुलते लक्षण वाले लोगों की मौत के बाद उनके किन्हीं दो बच्चों को 2,500 रुपये परवरिश के लिए दिए जाने हैं। हालांकि, विभाग का कहना है कि इस मद में अब धन आ गया है। शीघ्र ही रकम बच्चों को भेज दी जाएगी।
443 मृतकों के परिवारों को दिया जा चुका है मुआवजा
जनपद में कोरोना संक्रमण से मरने वाले 443 लोगों के परिवारीजनों ने मुआवजा के लिए आपदा विभाग में आवेदन किया था। 228 लोगों ने विभाग के पोर्टल पर आवेदन किया था, जिसमें से 192 लोगों को मुआवजा दिया जा चुका है। वहीं 407 लोगों ने ऑफलाइन आवेदन किया था। उनमें से 251 को मुआवजा दिया गया है। इन्हें आवेदन के आधार पर 50 हजार रुपये की दर से मुआवजा दिया जा चुका है।
कोरोना संकटकाल में माता-पिता को खोने वाले 213 बच्चे थे। ऐसे बच्चों के भरण-पोषण के लिए मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना कोविड तथा कोविड संक्रमण काल में मरने वाले ऐसे लोग, जिनमें कोविड की पुष्टि नहीं हुई थी, उन्हें सीएम बाल सेवा योजना सामान्य से लाभांवित करने के लिए योजना शुरू की गई थी। कोविड से मरने वालों के बच्चों को चार हजार रुपये प्रतिमाह तथा नॉन कोविड से मरने वालों के किन्हीं दो बच्चों को 2,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाने हैं। मार्च 2022 के बाद बजट न आने के कारण अप्रैल से इन्हें परवरिश राशि नहीं दी जा सकी। अब बजट आया है। उन बच्चों को शीघ्र ही रकम भेज दी जाएगी।
-विनय कुमार, जिला प्रोबेशन अधिकारी