नेपाल बाॅर्डर स्थित वाल्मीकिनगर से पडरौना तक मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की पटरी बननी है टू-लेन
50 किलोमीटर लंबी सड़क पर खर्च होंगे 75.65 करोड़ रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। नेपाल के पास स्थित बिहार के वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से निकली मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की पटरी को पडरौना तक टू लेन कर देना था, लेकिन करीब दो साल में भी सड़क पूरी नहीं हो पाई है। यह सड़क पडरौना की तरफ से ही करीब छह किलोमीटर अधूरी रह गई है। सड़क पर बने गड्ढों की वजह से राहगीरों को परेशानी हो रही है, जबकि यह सड़क जाम की स्थिति में बाईपास के रूप में उपयोग में आती है। कहा जा रहा है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए मिट्टी नहीं मिल रही है।
नेपाल बॉर्डर स्थित वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से पडरौना होते हुए मुख्य पश्चिमी गंडक नहर बिहार के गोपालगंज जिले में चली जाती है। इस नहर की एक पटरी पहले से पिच है। सांसद विजय कुमार दुबे ने वर्ष 2021 में प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री व डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या को प्रस्ताव दिया था कि अगर इस पटरी को टू-लेन सड़क में तब्दील कर दिया जाए तो पडरौना से महराजगंज व वाल्मीकिनगर तक आना-जाना आसान होगा।
इस रास्ते कुशीनगर के लोग आसानी से नेपाल की यात्रा कर सकेंगे। नेपाल के लोग कुशीनगर के पर्यटन स्थल समेत एयरपोर्ट तक आसानी से आ-जा सकेंगे। करीब 50 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण पर 75.65 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था। वर्ष 2022 में बिहार की तरफ से टू लेन सड़क का निर्माण शुरू हो गया था, लेकिन सदर तहसील क्षेत्र के मिश्रौली से लेकर पडरौना की सीमा में करीब छह किलोमीटर सड़क अधूरी रह गई है। इसमें बने गड्ढों और उखड़ी गिट्टियों की वजह से लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। नहर की पटरी संकरी ही रहने से दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है, क्योंकि एक तरफ नहर है तो दूसरी ओर 20 फीट गहरे गड्ढे।
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मुख्यमंत्री की जनसभा से हुई थी इस सड़क की चर्चा
29 मार्च को खड्डा में आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा में भी इस सड़क को टू लेन बनाकर नेपाल से जोड़ने का दावा किया गया था। कहना था कि इस सड़क से बिहार और नेपाल के जुड़ने से व्यापार सहित आवागमन और गौतम बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी जाने में सुविधा मिलेगी, लेकिन शहर में ही यह सड़क अधूरी रह गई है। वजह यह बताई जा रही है कि कार्यदायी संस्था ने यह कहते हुए निर्माण रोक दिया है कि उसे सड़क भरने के लिए मिट्टी नहीं मिल रही है। मिट्टी उपलब्ध कराने के लिए सिंचाई विभाग से कहा गया है। जब तक खेत खाली नहीं हो जाते, तब तक निर्माण होना मुश्किल है, जबकि यह सड़क शहर और आसपास के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है।
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शहर के बीच से होकर गुजरने वाली मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की पटरी बहुत उपयोगी है। टू लेन का काम करीब एक किलोमीटर शहर में हुआ है, लेकिन बाकी सड़क मिश्रौली तक अधूरी है। जनहित में इसका पूर्ण निर्माण जरूरी है।
सुरेंद्र कुमार, शहरवासी
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सड़क टू लेन हो रही थी तो बड़ी खुशी हुई थी कि शहर में जाम लगने पर इस रास्ते जनपद मुख्यालय आने-जाने में सहूलियत होगी, लेकिन कार्य कराने वालों ने शहर में ही अधूरा छोड़ दिया है।
सुभाष, बलुचहां
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मिश्रौली से बलुचहां मोड़ तक यह सड़क अधूरी है। इसमें जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। कहीं-कहीं गिट्टियां उखड़ गई हैं। इस कारण आवागमन में परेशानी हो रही है।
शैलेश, राहगीर
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पडरौना से बाल्मीकिनगर नगर तक यह सड़क टू लेन बनाई जानी है। बिहार की तरफ से तो सड़क बन गई है, लेकिन शहर में अधूरा छोड़ दिया गया है। सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण धूल उड़ती है,
मनोज मोदनवाल, शहरवासी
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कोट
इस सड़क के निर्माण के लिए डिप्टी सीएम को प्रस्ताव दिया था, जिसके बाद बननी शुरू हुई थी। शहर में बलुचहां मोड़ से मिश्रौली तक सड़क नहीं बन पाई है। जानकारी मिली है कि सड़क को चौड़ा करने के लिए काफी मात्रा में मिट्टी की आवश्यकता है, लेकिन शहरी क्षेत्र में इतनी अधिक मात्रा में मिट्टी नहीं मिल पा रही है। डीएम और एक्सईएन से कहा गया है कि मिट्टी की व्यवस्था कराकर सड़क को जल्द पूरा कराएं। मिट्टी का इंतजाम हो जाने पर एक माह के अंदर निर्माण शुरू हो जाएगा।
विजय कुमार दुबे, सांसद, कुशीनगर