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Kushinagar News: अमवा दीगर-भरथ पट्टी पुल बनने से 40 किमी घटेगी बेतिया की दूरी

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अमवा दीगर-भरथ पट्टी के बीच प्रस्तावित पुल निर्माण से यूपी-बिहार की राह होगी आसान
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वर्षों से सूनी पड़ी दियारा में बढ़ेगी चहल-पहल, युवाओं के लिए रोजगार और कारोबार के खुलेंगे नए रास्ते
पडरौना/गोड़रिया। नारायणी (गंडक) नदी पर अमवा दीगर से बिहार के भरथ पट्टी के बीच प्रस्तावित पुल के निर्माण से क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है। पुल बनने से बेतिया की दूरी करीब 40 किलोमीटर कम हो जाएगी। इससे कुशीनगर जिले के दुदही विकासखंड समेत अमवा दीगर, अमवा खास और बैकुंठपुर कोठी के आसपास के गांवों के लोगों को बिहार आने-जाने में राहत मिलेगी।
गंडक नदी के दोनों छोर पर बसे गांवों के बीच बेहतर संपर्क की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही है। करीब 250 करोड़ की लागत से अमवा दीगर-भरथ पट्टी के बीच प्रस्तावित पुल बनने से बिहार के भरथ पट्टी, नवलपुर, दुधीबाहा, पमखा और चंपापुर होते हुए बेतिया पहुंचना आसान हो सकेगा। अभी इन क्षेत्रों के लोग यूपी के पडरौना या बिहार के गोपालगंज के रास्ते करीब 110 से 120 किलोमीटर दूरी तय कर आवागमन करते हैं।
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पुल का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यह लंबी दूरी तय करने में लोगों का लगने वाला समय और यात्रा खर्च बचेगा। इससे दोनों राज्यों के बीच सामाजिक और आर्थिक संपर्क भी मजबूत होगा। पुल बनने से सबसे ज्यादा फायदा स्थानीय किसानों और कारोबारियों को मिलेगा। बेहतर आवागमन से किसान अपनी उपज कम समय में दूसरे बाजारों तक पहुंचा सकेंगे। इससे परिवहन खर्च घटने और कृषि उत्पादों की बिक्री के नए विकल्प मिलने की संभावना है।
वहीं, दोनों ओर के बाजारों के बीच संपर्क बढ़ने से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी। वहीं पुल चालू होने के बाद आवागमन बढ़ने से दुकानों, ढाबों, परिवहन और अन्य सेवाओं से जुड़े कारोबार को विस्तार मिल सकता है। इससे क्षेत्र में स्वरोजगार के अवसर बढ़ने के साथ युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार की नई संभावनाएं बन सकती हैं।
70 किलोमीटर हो जाएगी बेतिया की दूरी
गोड़रिया। अमवा दीगर-भरथ पट्टी पुल निर्माण नहीं होने से लोग अमवा दीगर से बरवा पट्टी, धनहा और चौतरवा होते हुए बेतिया जाने में लगभग 110-120 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। पुल बनने के बाद लोग सीधे बेतिया चले जाएंगे, जिससे उनकी दूरी घट कर करीब 70 किलोमीटर हो जाएगी। इससे लोगों का न केवल समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के लिए आवागमन आसान होगा।
इन गांव के लोगों को होगा सीधा लाभ
गोड़रिया। नारायनी नदी पर पुल बनने से यूपी अमवा दीगर, अमवा खास, रायपुर पट्टी, धोकरहा, जमुनिया, खानगी, दुदही, ठाढ़ीभार, विजपटवा, बरियापट्टी, बांसगांव, भवानीपुर, दरोगा डिह और उलटहवा-भुइधरवा समेत दर्जनों गांवों को सीधा लाभ मिलेगा। वहीं बिहार के नवलपुर, दुधीवहा, श्रीनगर, पटजीरवा, पुजहा, माता आस्था, मरिचहिया और मरचहवा सहित आसपास के गांवों के लोगों के लिए भी आवागमन आसान होगा। यह पुल उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती गांवों को जोड़कर दूरी कम करने के साथ व्यापार, रोजगार और विकास के नए रास्ते खोलेगा।
स्पीकअप
नारायणी नदी पर पुल बनने से दियारा क्षेत्र के लाखों लोगों की राह आसान होगी। आवागमन सुगम होने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। यह पुल क्षेत्र के विकास और खुशहाली की नई इबारत लिखेगा।
सुनील गौड़, निवासी, पडरौन मडुरही।
उत्तर प्रदेश और बिहार के दो प्रांतों के युवाओं को रोजगार, व्यापार और बेहतर भविष्य के नए अवसर मिलेंगे। आवागमन आसान होने से दोनों राज्यों के बीच संपर्क मजबूत होगा और दियारा क्षेत्र विकास की नई राह पर आगे बढ़ेगा। यह पुल सिर्फ दो राज्यों को नहीं, बल्कि लाखों लोगों की उम्मीदों, सपनों और खुशहाली को भी जोड़ेगा।

बलवंत सिंह, निवासी, चकदहवा।
नारायणी नदी पर पुल बनने से वर्षों पुराना सपना साकार होगा। उत्तर प्रदेश और बिहार के लाखों लोगों की राह आसान होगी, युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और दियारा क्षेत्र में विकास को गति देगा।
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रामप्रवेश पाल, निवासी, धोकरहा।
प्रस्तावित यह पुल दियारा क्षेत्र के लिए विकास का नया द्वार खोलेगा। उत्तर प्रदेश और बिहार के बीच दूरी घटेगी। वर्षों से पुल की आस लगाए लोगों का सपना हकीकत बनेगा। निसंदेह यह पुल आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बनेगा।

उपेंद्र कुशवाहा, निवासी, रामपुर पट्टी।
वर्जन
अमवा दीगर के पास नारायणी नदी पर बनने वाले पुल के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो गई है। त्योहार बाद इस संबंध में प्रगति धरातल पर दिखनी शुरू हो जाएगी।

- राहुल सोनी, एई, पीडब्ल्यूडी।
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