कसया। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थली कुशीनगर में केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय सारनाथ की ओर से आयोजित तीन दिवसीय बौद्ध महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को छाम नृत्य और सूत्र पाठ से बुद्धनगरी धम्ममय हो उठी। यहां लगी प्रदर्शनी में रंगीन नवनीत से उकेरी गई कलाकृतियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। कलाकारों की ओर से बनाए गए सिकता मंडल की भी लोगों ने सराहना की।
दूसरे सत्र में प्रोफेसर वांगचुक दोर्जे नेगी और प्रोफेसर आरसी नेगी ने विद्यार्थियों को संबोधित किया और भगवान बुद्ध के जीवन पर विस्तार से चर्चा की। मंगलवार को सुबह लगभग 11 बजे से कार्यक्रम की शुरूआत चेटिंग से की गई। इसके बाद लामाओं की ओर से वाद्ययंत्रों की संगत के साथ सूत्र पाठ किया गया।
अगली कड़ी में देछेन छोस्खोर लिंड, कार्युद विहार कलेमिंटन, देहरादून के लामाओं की ओर से बौद्ध तांत्रिक नृत्य छाम (सुंगखोरक्षा) की प्रस्तुति की गई। यह नृत्य तंत्र साधना के पूर्व जमीन को पवित्र करने के लिए किया जाता है।
इसके बाद रजो मंडल का निर्माण कर देवताओं का आह्वान और उनका अभिषेक किया जाता है। यह परंपरा भारत के बौद्धों से नालंदा होकर तिब्बत तक पहुंची है।
अब पूरे हिमालय क्षेत्र में प्रचलित है। दूसरी ओर महापरिनिर्वाण मंदिर में लगाई गई प्रदर्शनी में बौद्ध पद्धति में मक्खन से बनाई जाने वाली पूजन सामग्रियों, रजो मंडल का निर्माण, बौद्ध मंत्रों का पाठ किया गया।
इसके अलावा पारंपरिक तिब्बती चिकित्सा पद्धति सोवा-रिग्पा से लोगों का इलाज किया गया और उनमें दवा का भी वितरण किया गया। समारोह के दूसरे सत्र में गोरखपुर के एक पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों, भिक्षुओं और लामाओं को केंद्रीय तिब्बती अध्ययन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर वांगचुक दोर्जे नेगी और प्रोफेसर आरसी नेगी ने संबोधित किया।
इस मौके पर नोडल अफसर और डॉ. छेरिंग डकपा, स्टेट अफसर डॉ. फुनचोंग खोमचे, डॉ. लोअंग तेनझिंग, डॉ. दोर्जे डमडुल, डॉ. लोसंग दोर्जे, वरिष्ठ पुरातत्व संरक्षण अधिकारी पंकज तिवारी, राजेश मणि त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।