तमकुहीरोड। गन्ना अनुसंधान एवं प्रजनन संस्थान सेवरही में मंगलवार को कप्तानगंज और बस्ती के गन्ना किसानों को प्रशिक्षित किया गया। उन्हें संस्थान की ओर से प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। किसानों को हानिकारक कीटों के प्रकोप के बारे में जानकारी दी गई।
संस्थान के संयुक्त निदेशक डॉ. सुभाषचंद्र सिंह ने कहा कि गन्ने की फसल में भूमिगत कीट, बेधक कीट, चूसक कीट और पत्ती खाने वाले चार प्रकार के कीटों का प्रकोप होता है। इनसे गन्ने की फसल को बचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश गन्ना बाहुल्य क्षेत्र है। इसलिए गन्ने की महत्वपूर्ण फसल को हानिकारक कीटों व रोगों से बचाया जाना जरूरी है। संस्थान की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अर्चना सिराड़ी, डॉ. विनय मिश्र, डॉ. वाईपी भारती, डॉ. केके साहू ने दीमक, अंकुर बेधक, चोटी बेधक, पायरिला, सफेद मक्खी, तना बेधक आदि हानिकारक कीटों के बारे में जानकारी दी। इस दौरान डॉ. सत्येंद्र कुमार, डॉ. केपी सिंह, डॉ. कृष्णानंद, अजय राय, संजय शुक्ल, प्रेमप्रकाश द्विवेदी, श्रीकृष्ण शुक्ल आदि मौजूद रहे।