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लापरवाही: दो प्रसूताओं ने खुले में दिया बच्चों को जन्म

Fri, 05 Aug 2016 11:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला कुशीनगर
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खुले में दिया बच्चों को जन्म - फोटो : अमर उजाला
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र दुदही के स्वास्थ्यकर्मियों की लापरवाही शुक्रवार को खुलकर उजागर हो गई। अस्पताल में भर्ती दो प्रसूताओं को अस्पताल परिसर में खुले में ही बच्चा जनना पड़ा। स्वास्थ्यकर्मियाें ने इनमें एक प्रसूता को दूसरे दिन यह बताकर रेफर कर दिया कि गर्भ में पल रहे शिशु की मौत हो गई है और महिला की हालत गंभीर है। परिवारवाले प्रसूता को लेकर अस्पताल परिसर में ही थे कि उसने जमीन पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। वह बच्चा जीवित था। इसके थोड़ी ही देर बाद अस्पताल में भर्ती एक अन्य प्रसूता को भी स्वास्थ्यकर्मियों ने टहलने के लिए बाहर भेज दिया। दूसरी महिला का प्रसव भी खुले में ही हुआ। 
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दुदही क्षेत्र के पडरौन मडुरही की आशा गीता सिंह बृहस्पतिवार को दिन के दस बजे अपने गांव के अनिल की पत्नी लालमुनी का प्रसव कराने सीएचसी में ले आई थीं। लालमुनी को भर्ती करा दिया गया था। आशा का कहना था कि शाम तक प्रसव नहीं हुआ तो अस्पताल में तैनात एएनएम और नर्स ने रात में होने की उम्मीद जताई। रात में भी प्रसव न होने पर स्वास्थ्यकर्मियों ने सुबह तक इंतजार करने के लिए कहा, लेकिन शुक्रवार को सुबह तक बच्चा नहीं हुआ तो स्वास्थ्यकर्मियों ने यह कहकर प्रसूता को रेफर कर दिया कि उसके गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई है। महिला की हालत चिंताजनक है। यह सुनकर महिला के घरवालों के होश उड़ गए। वे लालमुनी को लेकर अभी अस्पताल परिसर में ही पहुंचे थे कि उसने जमीन पर बच्चे को जन्म दे दिया। वह बच्चा जीवित था। वहां मौजूद भीड़ स्वास्थ्यकर्मियों की यह लापरवाही देखकर सन्न रह गई। वहां मौजूद आशा और अन्य महिलाएं चादर फैलाईं और जच्चा-बच्चा को वार्ड में बेड तक ले गईं।   
अभी यह सब चल ही रहा था कि इसी क्षेत्र के कोइलहवा गांव की आशा मालती देवी की तरफ से भर्ती कराई गई गुड्डी खातून नाम की प्रसूता को स्वास्थ्यकर्मियों ने बाहर टहलने के लिए भेज दिया। उनका कहना था कि गुड्डी को बच्चा होने में अभी दो घंटे का विलंब है। परिवार के लोग गुड्डी को लेकर बाहर निकले ही थे कि उनका प्रसव भी जमीन पर ही हो गया। नवजात का सिर चोटिल हो गया। कुछ ही समय के अंतराल में दो प्रसूताओं के साथ हुई इस घटना के बाद आशा कार्यकर्ताओं ने काफी हंगामा किया। विरोध होते देख स्वास्थ्यकर्मियों ने आनन फानन में इलाज शुरू किया। इस संबंध में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एके पांडेय का कहना था कि मामला संज्ञान में है। जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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निर्धारित समय से नहीं खुल रही ओपीडी
 क्षेत्र के तीन लाख से अधिक लोगों के इलाज के लिए बने दुदही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरीजों का इलाज भगवान भरोसे है। डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की मनमानी के कारण मरीजों की जान पर हमेशा खतरा मंडरा रहा है। समय से अस्पताल न आना तो यहां के स्वास्थ्यकर्मियों की नीयति सी बन गई है। शुक्रवार को भी इस अस्पताल के ज्यादातर स्टॉफ नहीं थे।
सरकारी अस्पतालों में ओपीडी खुलने का समय शासन ने भले ही आठ बजे दो बजे तक निर्धारित किया है, लेकिन उसका पालन इन अस्पतालों में नहीं हो रहा है। 38 बेड वाले दुदही सीएचसी में शुक्रवार को सुबह 09.30 बजे तक नेत्र चिकित्सक, दंत चिकित्सक, पैथालॉजी कक्ष, एक्सरे, टीबी, दवा वितरण कक्ष सहित कई कमरों में ताला बंद था। महिला चिकित्सक कक्ष खुला था, लेकिन कुर्सी खाली थी। चीफ फार्मासिस्ट भी नहीं आए थे। एक डॉक्टर अपने कक्ष में बैठे मरीजों का इलाज कर रहे थे। कुछ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पहुंचे थे। जब इसकी सूचना सीएमओ को दी गई तो उन्होंने प्रभारी चिकित्साधिकारी को कार्रवाई का निर्देश दिया। उसके बाद प्रभारी चिकित्साधिकारी ने सभी अनुपस्थिति स्वास्थ्यकर्मियों को रजिस्टर में गैरहाजिर किया और वेतन रोका। 
इस संबंध में प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एके पांडेय का कहना था कि अनुपस्थित रहने वाले स्वास्थ्यकर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। उनका कहना था कि सोमवार को पेयजल की व्यवस्था करा दी जाएगी।

क्या कहते हैं मरीज और तीमारदार
पडरौन मडुरही गांव से आए अशोक जायसवाल ने बताया कि सुबह आठ बजे ही अस्पताल आ गए थे, लेकिन ओपीडी के किसी कमरे का ताला नहीं खुला था। अस्पताल में आने पर मालूम हुआ कि यहां के डॉक्टर दस बजे के बाद ही आते हैं।
बांसगांव की फेंकनी देवी ने कहा कि एक घंटे से एक्सरे टेक्निीशियन के आने का इंतजार कर रहे हैं। साढ़े नौ बजे तक एक्सरे कक्ष बंद पड़ा था। उन्होंने बताया कि अस्पताल में पेयजल का भी संकट है। 
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दुदही की बिंदू देवी ने बताया कि अस्पताल में शौचालय का इंतजाम नहीं है। भर्ती महिलाआें को भोजन नहीं मिलता है।
रीना देवी ने बताया कि शुक्रवार को सुबह सात बजे बच्ची का जन्म हुआ है। लेकिन साढ़े नौ बजे तक न तो नाश्ते में कुछ मिला और न भोजन। 
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