पकवा इनार। लोकसभा कुशीनगर के चुनाव में शुरुआत में जातीय समीकरण प्रभावी दिखाई दिया। लेकिन, मतदान की तिथि के घटने के साथ जातीय समीकरण टूटकर भाजपा के पाले में आकर जीत दिलाई है। गठबंधन की तरफ से कुशीनगर लोकसभा सीट पर खेले गए ओबीसी कार्ड भी काम नहीं आया। इसका नतीजा रहा कि जातीय समीकरण के आधार पर जीत पक्की मानने वाले इंडी गठबंधन व सपा प्रत्याशी को हार का मुंह देखना पड़ा है।
कुशीनगर लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी विजय कुमार दूबे के निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहे इंडिया गठबंधन व सपा प्रत्याशी अजय प्रताप सिंह उर्फ पिंटू सैंथवार जातीय समीकरण साधते हुए जीत पक्की करने चुनाव मैदान में उतरे थे। चुनावी प्रचार अभियान के शुरुआती दौर में लोकसभा सीट के पांच विधानसभा कुशीनगर, हाटा, रामकोला, खड्डा और पडरौना में यादव, मुस्लिम और सैंथवार समाज से चुनावी विजय रथ फहराने का आगाज काफी प्रभावशाली दिखाई दिया। देहात से लेकर शहर तक हर जगह चुनावी चर्चाओं के बीच जातीय गणित से इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी की जीत समर्थक, कार्यकर्ता और पदाधिकारी मान रहे थे। लेकिन, शुरुआत की जातीय समीकरण व जोड़-तोड़ मतदान की तिथि एक जून तक आते-आते कमजोर पड़ गई। इसका नतीजा यह हुआ कि भाजपा ने जातीय समीकरण के प्रभाव से निकलकर जीत का परचम फहराया है। जबकि इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी की तरफ से जातीय समीकरण को साधने के भरपूर कोशिश की गई, लेकिन वह जीत में तब्दील नहीं हो सका। हालांकि जीत में पूर्व के चुनाव से भाजपा इस बार कम मतों के अंतर से जरूर जीत दर्ज की है। इसलिए भाजपा के विजयी उम्मीदवार को आगे राजनीतिक कार्ड खेलने के लिए आने वाले पांच वर्ष में और बेहतर कार्य करने होंगे। संवाद