पडरौना (कुशीनगर)। भारत सरकार के अनुसूचित जनजाति आयोग की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अनुसूइया उइके ने कलेक्ट्रेट के सामने बुद्ध पार्क में आयोजित जन सुनवाई कार्यक्रम एवं स्वागत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कुशीनगर, संतकबीरनगर, चंदौली और संतरविदास नगर सहित प्रदेश के चार ऐसे जिले हैं, जहां गोंड जाति के लोग जाति प्रमाण पत्र के लिए परेशान हैं।
अन्य जनपदों में अनुसूचित जनजाति में इन्हें जाति प्रमाण पत्र जारी हो रहा है, लेकिन कुशीनगर में न तो एससी में जारी हो रहा और न ही एसटी में। प्रदेश सरकार ने इन जनपदों में निवास करने वाले गोंड जाति के लोगों को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा है, जिस पर भारत सरकार ने आयोग के अन्य सदस्यों के साथ उन्हें इस सिलसिले में जन सुनवाई करने और प्रशासन से वार्ता के लिए भेजा है।
जनसुनवाई कार्यक्रम में भीड़ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यहां गोंड जाति के लोग अनुसूचित जाति के कोटे में हैं। इसी श्रेणी में उन्हें जाति प्रमाण पत्र जारी होता रहा है। इन लोगों को अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में होना चाहिए। इसके बारे में वहां भारत सरकार को रिपोर्ट देंगी।
इससे पहले अखिल भारतीय गोंड आदिवासी संघ के जिलाध्यक्ष राधेश्याम गोंड और भारतीय गोंडवाना पार्टी के जिलाध्यक्ष दिनेश गोंड ने अपने सहयोगियों के साथ मंच पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अनुसूइया उइके और साथ में आए अन्य अतिथियों का स्वागत किया। इस कार्यक्रम में उनके साथ एक सर्वेक्षण टीम भी थी, जिसमें अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य हर्षाभाई बसावा, अनुसूचित जनजाति आयोग के सचिव पीटी जेम्स कुट्टी, केंद्रीय अनुसूचित जनजाति शोध संस्थान के निदेशक केडी मंसूर भी शामिल थे। इनका कहना था कि कुशीनगर जिले में गोंड जाति के लोग निवास करते हैं, जिसकी पुष्टि उनकी तरफ से किए गए सर्वे में भी हुई है।
इस दौरान पूर्व चेयरमैन महेंद्र गोंड, हीरालाल गोंड, नागेंद्र गोंड, तूफानी गोंड, सुुरेंद्र गोंड, बिंदेश्वरी गोंड, सूचित गोंड सहित आयोजन करने वाले संगठन से जुड़े काफी लोग मौजूद थे।
जनसुनवाई कार्यक्रम के बाद अनुसूइया उइके ने कलेक्ट्रेट सभागार में प्रभारी डीएम व सीडीओ कृष्ण कुमार गुप्त, एडीएम कृष्णलाल तिवारी, सभी एसडीएम और तहसीलदार के साथ वार्ता की। प्रभारी डीएम के मुताबिक उन्होंने सभी तहसीलदार की बातें सुनने के बाद कहा कि गोंड जाति के लोगों को विभिन्न वर्षों की पुरानी फसली सहित अन्य राजस्व अभिलेख यदि यहां के गोंड बिरादरी के लोगों का निवासी होने की पुष्टि करते हैं तथा शासनादेश के अंतर्गत आते हैं तो उन्हें अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र अवश्य जारी करें।