नासमझी की उम्र में इंटरनेट के जरिए बेटियों को दोस्ती के जाल में फंसा रहे चालबाज, फिर कर रहे गुमराह
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। दंरिदे नासमझ बच्चियों को निशाना बना रहे हैं। इंटरनेट या अन्य तरीकों से दोस्ती गांठकर उनकी जिंदगी से खेल रहे हैं। नासमझ बच्चियां नहीं जानतीं कि जिसे दोस्त समझ रही हैं, वे दरिंदे हैं।
दरिंदगी का खेल खेलकर दरिंदे जेल भेज भी दिए जाएं तो कुछ दिनों में बाहर आ जाते हैं। लेकिन किशोरियों को वे घटनाएं जीवन भर उबरने नहीं देतीं।
बार-बार शादी टूट जाने की युवती से पूछिए तो वह सिसकने लगती है। कहती है कि मैं तो समझ ही नहीं पाई थी। वह मेरे साथ ऐसा कर देगा, लेकिन अब सब बर्बाद हो चुका है। युवती का कहना था कि एक युवक जब वह 15 वर्ष की थी। इसी बीच फेसबुक से माध्यम से जुड़ गया। बातें करने लगा। इस बीच उसने शादी का झांसा देकर कई बार दुष्कर्म भी किया। जब युवती 22 वर्ष की हो गई और शादी करने के लिए कही तो उसने मना कर दिया। अब युवती की शादी कहीं तय हो रही है तो युवक वीडियो भेजने की धमकी देते हुए शादी तोड़ दे रहा है। इससे परेशान होकर युवती ने आत्महत्या का प्रयास भी किया। लेकिन परिजनों ने उसकी जान बचा ली। इसके बाद युवती ने थाने में तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की। जिसपर नेबुआ नौरंगिया की पुलिस दुष्कर्म सहित अपहरण का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
दुष्कर्म की शिकार बच्चियां कहती हैं। इज्जत-आबरू गंवाने के बाद अब उन्हें समाज के ताने सुनने पड़ते हैं। अपने ही मुंह मोड़ लेते हैं। पीड़ित बच्चियों की मानसिक स्थिति और खराब हो रही है। कई तो ऐसी हैं जो समय से इलाज न होने की वजह से अवसाद में चली जाती हैं। ऐसे में कई बार वे आत्मघाती कदम उठाकर खुद की जिंदगी खत्म कर देती हैं। कई बार उन्हें ठीक करने के लिए मां-बाप को शहर छोड़ने जैसा बड़ा फैसला लेना पड़ता है।
कुशीनगर में हर साल औसतन 6,00 से अधिक किशोरियों की जिंदगी ऐसे ही हैवान खराब कर रहे हैं। दोस्ती के जाल में फंसकर एक गलत फैसले से उनकी जिंदगी तबाह हो चुकी है। इनमें कई ऐसी भी हैं, जो पढ़ने-लिखने में मेधावी थीं। डॉक्टर-इंजीनियर बनने का सपना देखती थीं। लेकिन आज वे अवसाद में जीवन गुजार रही हैं। इन किशोरियों के घरवालों के सपने भी बिखर गए। अब वे डॉक्टरों से दवा और काउंसिलिंग की मदद से उनकी मानसिक स्थिति को ठीक करने की जद्दोजहद में जुटे हैं।
केस एक
कर रही थी डाॅक्टरी की तैयारी, प्रेम-प्रसंग में हो गई गर्भवती
विशुनपुरा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी 17 वर्षीय किशोरी ने डाॅक्टरी की पढ़ाई के लिए पडरौना शहर में किराए के मकान में रहकर तैयारी शुरू की। इसी बीच फेसबुक के माध्यम से सदर कोतवाली थाना क्षेत्र का एक युवक जो वर्तमान में ग्राम प्रधान का लड़का है। उसने किशोरी को अपने झांसे में लेकर वर्षों तक दुष्कर्म किया। जब किशोरी 25 वर्ष की हो गई तो युवक ने उसे गर्भवती कर दिया। युवती को जानकारी होते ही शादी का दबाव बनाने लगी तो युवक ने मना कर दिया। युवती युवक के घर जाकर उसकी मां को आपबीती बताई तो उसकी मां ने युवती को बच्चा गिराने की सलाह दी। कहने लगी कि यह सब तो होता रहता है। तहरीर देने पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया।
विश्वास में लेकर कर दिया गर्भवती, 10 दिन पूर्व गया जेल
सदर कोतवाली थाना क्षेत्र के एक युवती ने बताया जब वह नौ में पढ़ती थी। इसी बीच जटहा बाजार थाना क्षेत्र का युवक ने उसे झांसे में ले लिया। तब उसकी उम्र 16 वर्ष की थी। दोस्ती के नाम पर किशोरी से दुष्कर्म कर दिया। इससे उसके पेट में बच्चा ठहर गया। किशोरी ने लज्जा के मारे किसी से कुछ बताया नहीं। जब उसके पेट में सात महीने का बच्चा हो गया तो किशोरी की मां को जानकारी हुुई तो उसने आपबीती बताई। पुलिस ने किशोरी की तहरीर पर केस दर्ज कर युवक को न्यायालय भेजते हुए जेल भेज दिया है।
ओपन सोसाइटी के चक्कर में भटकाव
पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बढ़ा है। कई अभिभावक घर में ओपन सोसाइटी की बात बेहिचक करते हैं। कम उम्र के बच्चे इसका सही मायने समझे बिना इस सोसाइटी का हिस्सा बनने की कोशिश करते हैं। फिल्में, टीवी, सीरियल भी प्यार को तरह-तरह से परिभाषित करते हैं। युगल के साथ को आज की जरूरत की तरह पेश करते हैं। बेटा हो या बेटी इन सभी चीजों का प्रभाव उनके रहन-सहन सोचने के ढंग पर असर डालता है। भटकाव की नौबत तक भी ले जाता है।
-मिश्रा, मनोवैज्ञानिक
सुविधाएं दें, मगर दुरुपयोग न होने दें
किशोरावस्था में बच्चों को सही-गलत की ज्यादा समझ नहीं होती। ऐसे में पूरी जिम्मेदारी अभिभावकों की होती है। उन पर नजर रखें। उनकी हर गतिविधियों का मूल्यांकन करें। बच्चों के व्यवहार में बदलाव आने पर काउंसिलिंग करानी चाहिए। सुविधाएं देने में खराबी नहीं है। लेकिन उनका दुरुपयोग न हो। अनुशासन की कमी की वजह से भी ऐसे मामले सामने आते हैं।
-डा. अभय राय, समाजशास्त्री
दुष्कर्म से शारीरिक-मानसिक तौर पर टूट जाती हैं
दुष्कर्म का प्रभाव न केवल पीड़िता को शारीरिक रूप से बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी प्रभावित करता है। यह पीड़िता के दिमाग पर कई तरीके से असर डालता है। प्रमुख अवसाद है। लेकिन सबसे खराब स्थिति में व्यक्तित्व विकार का विकास हो सकता है। वहीं, सबसे आम पीटीएसडी। पोस्ट ट्राउमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर है। पीड़ीता के दृष्टिकोण से चाहे सामूहिक हो या एक एकल दुष्कर्म मनोवैज्ञानिक आघात के समान है। ऐसे में अभिभावक को सब कुछ भूलकर अपने बच्चों की मानसिक स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। कई बार चिकित्सक के पास पहुंचने पर इतनी देरी कर देते हैं कि मर्ज बढ़ जाता है। दवाओं और काडंसिलिंग की मदद से ऐसे मरीजों को उबारा जा सकता है। मरीज की जरूरत के हिसाब से उन्हें सलाह दी जाती है।
-डा. उज्जवल सिंह, मानसिक रोग विशेषज्ञ