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Kushinagar News: जिले में नहरों का बिछा जाल...किसान सिंचाई के लिए बेहाल

Tue, 27 Jun 2023 12:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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पानी के बगैर सुखी पड़ी माधी मठिया माइनर, बगल में चल रहा पंप सेट।संवाद
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फोटो है।
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रामकोला, पकड़ियार बाजार, समउर बाजार, तमकुहीराज समेत अन्य क्षेत्रों की नहरों में नहीं पहुंच रहा पानी
जिले में 1,700 किलोमीटर तक बिछा है नहरों का जाल, करीब दो लाख किसान करते हैं नहरों से सिंचाई

संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिले में नहरों का जाल तो बिछा है, लेकिन किसान सिंचाई के लिए परेशान हैं। नहरों में हेड से टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा तो कुछ नहरों में अभी तक एक बूंद पानी नहीं आया।
सिंचाई विभाग की तरफ से लाखों रुपये खर्च कर हर वर्ष नहरों की सफाई कराई जाती है, लेकिन यह समस्या हमेशा बनी रहती है। नहरों में पानी नहीं पहुंचने के कारण सिंचाई करने में किसानों की जेब ढीली हो रही है।
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किसानों ने बताया कि नहरों की बेहतर ढंग से सफाई नहीं होना और बीच में ही पानी रोक देने से यह समस्या हो रही है। हालांकि, सिंचाई विभाग की फाइलों में नहरें बेहतर ढंग से संचालित हैं, लेकिन हकीकत यह है कि ज्यादातर जगहों पर नहरों में पानी नहीं पहुंच रहा है।

कुशीनगर जिले में 1,700 किलोमीटर लंबी नहरों का जाल बिछा है, इससे लगभग 50,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। इन नहरों से जनपद के करीब दो लाख किसान लाभान्वित होते रहे हैं।
सिंचाई विभाग के अनुसार जिले में कुल 246 नहरें हैं। इनमें कप्तानगंज रजबाहा से जुड़ीं नहरों में पानी है। इससे गजरा, कोटवा, सोहनी, इंदरपुर, पचार, बोदरवार, देवउरवा, खभराभार, गंभीरपुर गांव से जुड़े किसान खेत की सिंचाई कर ले रहे हैं।
फाजिलनगर क्षेत्र के जोकवा रजबाहा में भी पानी है। इससे छहूं, झनकौल, महासोन, सरैया महंथपट्टी, धुनवलिया आदि गांव के किसान सिंचाई कर पा रहे हैं, लेकिन इन नहरों में भरपूर पानी न आने के कारण उस क्षेत्र के सभी किसानों के खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है।
तमकुहीराज क्षेत्र से होकर निकले कोटवा माइनर में भी पानी आया है, लेकिन इसमें भी हेड से टेल तक पानी नहीं आने से नहर से दूरी पर स्थित खेताें तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। इस माइनर से खेतों की सिंचाई की आस लगाए मुन्नीपट्टी, माधोपुर बुजुर्ग, गोड़इता श्रीराम, लतवा मुरलीधर, लतवाजीत, कोटवा अहिरौली, सरया आदि गांवों के किसान पानी आने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इन गांवों के किसानों का कहना है कि उनकी धान की बुआई पिछड़ रही है।
पकड़ियार क्षेत्र के बनचहरी माइनर में पानी नहीं है। इससे सौरहा खुर्द, चरिघरवा, दुबरहां, नंदन छपरा आदि गांवों के किसान पंपिंगसेट चलाकर धान की रोपाई करने को विवश हैं। मीर माइनर में भी पानी नहीं छोड़ा गया है। नतीजतन, सेंदुरिया बुजुर्ग, धार मठिया, पटहेरवा, सपहीं, पिपराकनक, मीर बिहार आदि गांवों के किसानों को खेत की सिंचाई के लिए निजी संसाधनों का प्रयोग करना पड़ रहा है।
रोंवारी से निकली माघी मठिया माइनर में भी पानी नहीं है। इससे रोंवारी, दमोदरी, सेखुई मिश्र, माघी मठिया समेत अन्य गांवों के किसान सिंचाई के लिए परेशान हैं। न तो नहरों में पानी आया और न ही सफाई कराई गई। कुछ एक नहरों की सफाई कराकर खानापूर्ति कर ली गई है। नतीजतन, किसान धान की खेती पिछड़ते देखकर पंपिंगसेट से सिंचाई करने के लिए विवश हो रहे हैं, जिसमें उनकी लागत अधिक आ रही है।


किसानों से बातचीत



मानसून आने में देरी हो रही है। सरकार के आदेश के बावजूद अब तक नहर में पानी नहीं आया है। डीजल महंगा होने के कारण धान की फसल की रोपाई प्रभावित हो रही है। नहर में पानी नहीं आने से अन्य फसलों की सिंचाई भी प्रभावित हो रही है।
- रामअवतार बैठा, निवासी माधोपुर बुजुर्ग


एक एकड़ खेत में धान की रोपाई करानी है। खेत के बगल में नहर है, लेकिन दस वर्ष से पानी नहीं आता है। बारिश भी नहीं हो रही है। पंपिंगसेट से धान की रोपाई करा रहे हैं।
-उपेंद्रनाथ गुप्ता, सौरहा खुर्द


24 डिस्मिल खेत में धान की रोपाई करा रहे हैं। इस वर्ष मौसम ने तो दगा दिया ही है, नहर में पानी भी नहीं आ रहा है। डीजल खरीदकर खेती करना पड़ रहा है, जिससे लागत बढ़ रही है।
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-अजीम अंसारी, किसान चरिघरवा




नहरों की सफाई बेहतर ढंग से कराई गई थी। समय से पानी भी छोड़ा गया। किसानों को सिंचाई में कोई समस्या न हो, इसका पूरा ख्याल रखा जाता है। अगर कहीं गड़बड़ी है तो उसकी जांच के बाद समस्या का समाधान करा दिया जाएगा।

-बोधई राम, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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