पडरौना। सहालग का दौर चल रहा है। होली भी दहलीज पर है। इसको देखते हुए जिले में मिलावटखोरी का धंधा तेज हो गया है। मिल्क केक की आड़ में शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में मिठाइयों में मिलावट की जा रहा है। छोटी दुकानों में स्टॉक वाली पुरानी मिठाइयों को नया बनाकर भी बेचा जाने लगा है। गोरखपुर, सीतामढ़ी, बाराबंकी समेत अन्य स्थानों से कला सीखकर आए धंधेबाज खराब होने के कगार पर पहुंच चुकी पुरानी मिठाइयों से नई मिठाई बना रहे हैं। त्योहारों पर मिल्क केक, काजू की बर्फी, छेना, गुलाब जामुन समेत अन्य मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है। होली पर खोया से बनने वाली गुजिया की तो अलग ही शान है। इन्हीं मिठाइयों की गुणवत्ता की आड़ में धंधेबाज भारी मिलावट कर रहे हैं। तुर्कपट्टी फाजिलनगर, कसया, रामकोला, कप्तानगंज, खड्डा समेत जिले के अन्य कस्बों और ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिष्ठानों पर ताजा मिठाई की आड़ में पुरानी मिठाइयों को नया बनाकर खपाने का धंधा तेजी से फल-फूल रहा है। नाश्ते वाली मिठाई की डिमांड की पूर्ति के लिए दुकानदारों का एकमात्र सहारा मिलावट है। सूत्रों के मुताबिक लगन और होली में मिठाइयों की बढ़ती मांग पूरी करने के लिए धंधेबाज पुरानी मिठाइयों को मिलाकर नया मिठाई तैयार कर रहे हैं।
कार्रवाई के बाद भी नहीं मानते मिलावटखोर : खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की तरफ से जिले के अलग-अलग स्थानों की दुकानों पर बिक रहे खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाता है। लेकिन उसकी जांच रिपोर्ट आने में महीनों तक का समय लग जाता है। खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर नकारात्मक परिणाम आने के बाद जुर्माना भी कोई बहुत बड़ा नहीं लगता। उधर मिलावटखोर त्योहारों पर बढ़ी मांग का फायदा उठाकर इस कारोबार से जुड़े लोग मिलावटी का खेल कर हजारो रुपये प्रतिदिन कमाते हैं। इसके चलते विभाग की कार्रवाई महज खानापूर्ति तक सिमटकर रह जाती है।
तत्काल कार्रवाई नहीं होने से धंधेबाजों का बढ़ता है हौसला :
प्रत्येक वर्ष सहालग या त्योहारी सीजन में मिठाइयों की बढ़ती मांग के बाद मिलावटखोरी बढ़ जाती है। सस्ते के चक्कर में लोग भी उन दुकानों से खरीदारी करते हैं। नमूने एकत्र करने के बाद जांच रिपोर्ट आने में महीनों का समय लग जाता है। इसके बाद उनके खिलाफ केस दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू होती है। एडीएम न्यायालय में केस चलने के बाद निर्णय आने में साल बीत जाता है। तत्काल कार्रवाई नहीं होने से मिलावटखोरों का हौसला बढ़ता है, जिससे मिलावट का कारोबार फलता फूलता रहता है।
बाहर से भी आते हैं कारोबारी : जनपद में दुकानों पर मिठाई बनाने के लिए स्थानीय कारीगरों के अलावा लखनऊ, बाराबंकी, यूपी के सीतामढ़ी, बिहार के सीतामढ़ी के सर्वाधिक कारीगर आते हैं। ये कारीगर केमिकल आदि का मिठाइयों में प्रयोग कर खराब पड़ी मिठाइयों को इस तरह बनाते हैं कि सामान्य लोग मिलावट की पहचान नहीं कर पाते हैं। इसी का फायदा कारोबारी उठाकर मोटी रकम कमाता है।