कप्तानगंज। कस्बे के एनएच-730 पर सीएचसी और ब्लाॅक कार्यालय से बंदेलीगंज तक हुए अतिक्रमण पर बुधवार को प्रशासन का बुलडोजर चला। अतिक्रमण हटाने का दुकानदारों ने विरोध किया, लेकिन प्रशासन ने इनकी एक नहीं सुनी, क्योंकि चार माह पहले ही उन्हें नोटिस दिया जा चुका था। अतिक्रमण की जद में आईं 24 से अधिक दुकानें हटाई गईं। इस दौरान प्रशासन सतर्क रहा, क्योंकि पांच माह पहले तहसील गेट पर अतिक्रमण हटाने के दौरान एक सभासद ने शरीर पर पेट्रोल छिड़ककर खुद को आग के हवाले करने की कोशिश की थी।
सीएचसी और ब्लॉक कार्यालय पर हाईवे के किनारे काफी दिनों से अतिक्रमण कर दुकानें खुल गई थीं। इससे हादसे का जहां डर बना रहता था, वहीं जाम की समस्या नासूर बन गई थी। नगर पालिका प्रशासन की ओर से कई बार दुकानदारों को अतिक्रमण हटाने के लिए कहा गया। लेकिन, अतिक्रमणकारी नहीं सुन रहे थे। चार माह पहले प्रशासन ने तहसील गेट से जब अतिक्रमण हटवाया, तभी इन दुकानदारों को नोटिस दे दिया था। उस समय अतिक्रमण हटाने के दौरान विवाद बढ़ गया। इसके चलते प्रशासन की कार्रवाई ठंडी पड़ गई थी।
उद्घोषणा कराने के बाद एसडीएम योगेश्वर सिंह, ईओ योगेश प्रताप मिश्र पुलिस बल और कर्मचारियों के साथ ब्लॉक गेट पर बुधवार को पहुंचे। जेसीबी मशीन भी कुछ देर बाद पहुंच गई। अतिक्रमण हटाने का दुकानदार विरोध करने लगे और कुछ दिन समय मांगा। लेकिन, प्रशासन ने इनकी एक नहीं सुनी और अतिक्रमण हटाना शुरू कर दिया। प्रशासन का तेवर देख दुकानदार खुद ही अतिक्रमण हटाने लगे। तीन घंटे तक चली अतिक्रमण की कार्रवाई के बाद अतिक्रमण की जद में आई 24 से अधिक दुकानों को हटा दिया गया। एसडीएम योगेश्वर सिंह ने बताया कि हाइवे किनारे अतिक्रमण होने से जाम लगता था और हादसे का भी डर था। नोटिस देने के बाद भी कई बार मौखिक निर्देश अतिक्रमण हटाने के लिए दिया गया। लेकिन दुकानदार सुन नहीं रहे थे। इस लिए पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण खाली कराया गया।
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धोबीघाट की जमीन से हटवाया अतिक्रमण
उजारनाथ। उच्च न्यायालय के आदेश पर तमकुहीराज के गांव जवार में पोखरी के धोबीघाट पर हुए अतिक्रमण को बुधवार को तहसील प्रशासन ने हटवाया। इस जमीन पर दस लोगों ने कब्जा किया था।
गांव के पोखरी स्थित धोबीघाट के लिए आरक्षित भूमि पर कुछ लोगों ने अवैध अतिक्रमण कर पक्का मकान आदि बना लिया था। गांव के सोनमती देवी आदि ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल कर अतिक्रमण को हटाने का आदेश तहसील प्रशासन को दिया था। इस दौरान बासदेव वर्मा, श्रीराम गौड़, हारून अली, मुखलाल गौड़, रामू गुप्ता, श्यामू गुप्ता, रवि गुप्ता, कमलेश, छोटे गुप्ता, प्रमोद गुप्ता को नोटिस देकर अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। लेकिन अतिक्रमण नहीं हटाया। इसको गंभीरता से लेते हुए बुधवार को तहसील प्रशासन ने अतिक्रमण हटवाया। जबकि दो भूमिहीन बासुदेव वर्मा व हारून अली को तहसीलदार चंदन शर्मा ने आवासीय पट्टा देने का आश्वासन दिया।इस दौरान कानूनगों अयोध्या प्रसाद, राणा प्रताप सिंह, लेखपाल जावेद आलम, राजू कुमार, यशपाल सिंह, श्याम पांडेय, अलिउल्लाह, संतोष गुप्ता, एसआई दशरथ कुमार, श्याम सिंह आदि मौजूद रहे।