पडरौना। मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी से दलालों का मोहभंग नहीं हो रहा है। बुधवार को प्राचार्य डॉ. आरके शाही अचानक इमरजेंसी में पहुंचे तो डॉक्टर बिना एप्रन में मरीजों का इलाज करते मिले और फाॅर्मासिस्ट ईसीजी कक्ष में बैठे थे, जबकि इंटर्नशिप करने वाला युवक मरीजों का नाम रजिस्टर में दर्ज कर रहा था। इस पर प्राचार्य नाराज हुए और बोले फार्मासिस्ट का काम रजिस्टर में मरीजों का नाम दाखिल करना है, वे खुद एप्रन में अपनी कुर्सी पर बैठकर काम करें, इधर उधर बैठने की जरूरत नहीं है। अगर दलालों को शह मिली तो खैर नहीं है। इसके अलावा ओपीडी, एक्सरे व पैथालॉजी का भी निरीक्षण किया।
मेडिकल कॉलेज में दलालों की सक्रियता कई बार सामने आ चुकी है। पूर्व में छह दलालों को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेजी थी, इसके बाद कुछ दिनों तक मामला शांत रहा। अब इंटर्नशिप करने की आड़ में निजी अस्पतालों में दलालों के माध्यम से मरीजों को पहुंचाने का खेल फिर शुरू हो गया है। दिन में 11 बजे प्राचार्य इमरजेंसी में पहुंचे। इनको देखते हुए अफरा-तफरी मच गई। मेडिकोलीगल करा रहे थे, जबकि फार्मासिस्ट बीपी सिंह भी इसी कक्ष में कुर्सी पर बैठे थे, इनका काम इंटर्नशिप करने वाला युवक कर रहा था। इस पर प्राचार्य नाराज हो गए और बोले आप अपना काम खुद करो, वहीं बिना एप्रन का ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मारकंडेय यादव को चेतावनी देते हुए कहा कि सुधर जाइए नहीं तो कार्रवाई कर दूंगा। इसके बाद वह नई बिल्डिंग में संचालित ओपीडी में पहुंचे, जहां पर कई डॉक्टर अपने कक्ष में बिना एप्रन पहने मरीजों का इलाज कर रहे थे और ड्यूटी से गार्ड गायब मिले। इस पर प्राचार्य ने सभी को चेतावनी देते हुए कहा कि कोई डॉक्टर अपने कक्ष में दलालों को न बैठाएं, इसको लेकर सजग रहें।