फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kushinagar News: लोक अदालत में ऋण की रकम कम होने से संतुष्ट हुए कर्जदार

Sun, 10 Dec 2023 01:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
पडरौना। जनपद के जिला एवं सत्र न्यायालय में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। प्रभारी जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष मोहम्मद रिजवान अहमद की मौजूदगी में कुल 94230 वादों का निस्तारण किया गया। इसमें फौजदारी के 7320 मामलों का निस्तारण किया गया और इससे प्राप्त 1,96,070 रुपये जुर्माने के रूप में राजकीय कोष में जमा कराए गए।
विज्ञापन

इसी प्रकार मोटर दुर्घटना से संबंधित 69 मामलों का निस्तारण करते हुए मृतकों एवं घायलों के परिजनों को 4,67,69,000 (चार करोड़ सरसठ लाख उनहत्तर हजार) रुपये का मुआवजा दिलाया गया। पारिवारिक न्यायालयों के 30 मामलों का आपसी सुलह समझौते के आधार पर निस्तारण हुआ।
यहां बैंक ऋण के मामलों का प्री-लिटिगेशन स्तर पर बैंकों ने कुल 1,362 व्यक्तियों के ऋण के मामले निस्तारण करते हुए 21,95,88,940 (इक्कीस करोड़ पंचानबे लाख अठ्ठासी हजार नौ सौ चालीस) रुपये टोकन राशि के रूप में प्राप्त किया तथा 534 राजस्व वादों का निस्तारण किया गया।
विज्ञापन

इस अवसर पर विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी)/नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत सुनील कुमार यादव, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रविकांत यादव, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सत्यपाल सिंह प्रेमी तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े अन्य लोग व अधिवक्ता मौजूद थे।
00
परिचर्चा-
काफी समय पहले स्वयं सहायता समूह के लिए पंजाब नेशनल बैंक की खड्डा शाखा से 1.90 लाख रुपये कर्ज लिया था। उसे चुका नहीं पाने के कारण कर्ज के लगातार बढ़ने से परेशान था। राष्ट्रीय लोक अदालत में 1000 रुपये देकर रजिस्ट्रेशन करा लिया है। बैंक ने ऋण जमा करने के लिए तीन महीने का समय दिया है। यहां आकर संतुष्ट हूं। -देवेंद्र कुमार, अध्यक्ष, गांधी स्वयं सहायता समूह सोहरौना, खड्डा
00
पांच साल पहले बैंक से ऋण लिया था, लेकिन स्थिति ठीक न होने के कारण कर्ज बढ़ता गया। लोक अदालत में पूरा ब्याज माफ हो गया है। टोकन राशि के रूप में 10,000 रुपये जमा किया है। संतुष्ट हूं कि अब ऋण चुकाने में आसानी होगी। -अदालत गुनराज, रामकोला
00
केसीसी से 26,600 रुपये ऋण लिया था, लेकिन फसल खराब हो जाने के कारण ऋण जमा नहीं कर पाया था। लोक अदालत में केवल 3,200 देकर अपना ऋण चुका दिया है। संतुष्ट हूं। -निजामुद्दीन, दुदही
00
घर में कुछ निजी काम के लिए बैंक से ऋण लिया था। समय से चुका न पाने के कारण कर्ज बढ़कर 90,000 हो गया था। राष्ट्रीय लोक अदालत में आने पर कर्ज की रकम भी कम होकर 51,000 रुपये हो गई है। अब संतुष्ट हूं कि अब ऋण चुकाने में आसानी होगी। -राम रसायन पाल, भगड़ा पिपरासी, कुबेरस्थान
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें